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नो फ्यूल नो बिजली...दिल्ली पहुंचाएगी हाइड्रोजन ट्रेन, 110 KM की होगी रफ्तार, जानें क्या है खासियत

Hydrogen Train : भारतीय रेलवे ने हरियाणा में संचालित हाइड्रोजन ट्रेन को दिल्ली तक संचालित करने का प्लान तैयार किया है। जल्द ही रूट विस्तार तक इसके समय सारणी में परिवर्तित करते हुए राजधानी तक चलाया जाएगा।

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दिल्ली तक चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन

Hydrogen Train : भारत में हाइड्रोजन ट्रेन की हरियाणा में एंट्री हो चुकी है। हालांकि, इसमें सफर करने वाले यात्रियों की संख्या बेहद कम रही, जिससे इसके विस्तार पर चर्चा चल रही है। रेलवे मंथन कर रहा है कि इसको दिल्ली तक संचालन कर यात्रियों की कमी से निपटा जाए। फिलहाल, इसके रूट को दिल्ली तक सर्वे किया जा रहा है, ताकि इसे राजधानी तक चलाकर यात्रियों में इसका क्रेज बढ़ाया जाए। हालांकि, रेल मंत्री ने इसके संचालन को लेकर पहले ही संकेत दे दिए थे।

दरअसल, 17 जुलाई 2026 को देश की पहली आठ डिब्बों वाली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ किया गया था। हालांकि, 19 जुलाई से जींद-गोहाना-सोनीपत रूट पर इस आम यात्रियों के लिए शुरू किया गया था, लेकिन शुरुआत से ही यात्रियों की कमी दर्ज की जा रही है। 2600 यात्रियों की झमता वाली विश्व की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन के जरिए 20 से 20 अगस्त तक एक महीने में महज दो हजार यात्रियों ने सफर का लुत्फ लिया। लेकिन, समय से साथ भी पैसेंजर की संख्या में बढ़ोतरी नहीं देखी जा रही है, जिससे रेलवे की चिंता बढ़ती जा रही है। ऐसे में दिल्ली डीएमआरसी ने सोनीपत के अधिकारियों से प्रस्ताव मांगा कि हाइड्रोजन ट्रेन को किस समय पर चलाया जाए, ताकि इसे अधिक यात्री मिल सकें। मीडिया खबरों के हवाले से अधिकारियों ने प्रस्ताव भेजकर यात्रियों की कमी के कारण और नए समय को मेंशन किया गया है।

फिलहाल, हाइड्रोजन ट्रेन में सिर्फ स्थानीय यात्री ही सफर कर रहे हैं क्योंकि किसी अन्य ट्रेन से लिंक नहीं है। इसमें जींद व गोहाना से सोनीपत के लिए और सोनीपत से गोहाना और जींद के लिए स्थानीय यात्री ही चढ़ते हैं। जींद, गोहाना से दिल्ली की ओर जाने वाले यात्री नहीं चढ़ते। इसका मुख्य कारण जिस समय यह चलती है, इससे आगे के लिए गाड़ियां नहीं मिल पाती।

इन स्टेशनों के बीच पड़ने वाले स्टेशन व हाल्ट आबादी से तीन से चार किलोमीटर दूर हैं और गावों के बीच आवागमन के लिए कोई वैकल्पिक साधन नहीं है। ट्रेन पकड़ने व ट्रेन से उतर अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्रियों को पैदल आवागमन करना पड़ता है। इसके अलावा कई हाल्ट पर टिकट भी नहीं मिलते, इसलिए लोग ट्रेन से सफर करने से बचते हैं। हालांकि, यात्रियों को उनके गांव से साधन उपलब्ध रहते हैं। ऐसे में यात्री सुविधा को ज्यादा तवज्जों दे रहे हैं।

हाइड्रोजन ट्रेन चलने का समय

सुबह 9 बजकर 40 मिनट पर सोनीपत पहुंचती है

10 बजकर 10 मिनट पर सोनीपत से गोहाना के लिए चलती है।

हाइड्रोजन ट्रेन स्टेशन लिस्ट

  • जिंद सिटी
  • पांडु पिंडारा जंक्शन
  • ललित खेरा ल्ट
  • भंभेवा
  • ईसापुर खेड़ी
  • बुटाने
  • खंदराई
  • राभड़ा
  • लाठ
  • मोहना
  • बड़वासनी
  • सोनीपत न्यू

अगला प्रस्ताव क्या है

जानकारी के मुताबिक, अधिकारियों ने प्रस्ताव में लिखा है कि हाइड्रोजन ट्रेन सुबह 5 बजकर 45 मिनट पर जींद से खुले और 7 बजकर 30 मिनट पर सोनीपत पहुंचे तो इसमें दिल्ली जाने वाले यात्रियों के लिए तीन लोकल ट्रेने 7 बजकर 35 मिनट, 7 बजकर 50 मिनट और 8 बजकर 10 मिनट पर मिल सकेंगी। इसके अतिरिक्त 9 बजकर 28 मिनट पर झेलम एक्सप्रेस भी पकड़ सकते हैं। अगर, ऐसा होता है तो यात्रियों को सहूलियत मिलेगी।

इसके अलावा उसी दिन इसे जींद में खड़े रखने के बजाय सोनीपत रेलवे स्टेशन पर खड़ा किया जाए और शाम 5 बजे गोहाना के लिए रवाना किया जाए तो दिल्ली से 5 बजकर 5 मिनट पर सोनीपत पहुंचने वाली लोकल, जिससे बड़ी संख्या में यात्री आते हैं, उसके यात्री भी हाइड्रोजन ट्रेन में गोहाना और जींद जा सकते हैं। अगर रेलवे इस टाइम टेबल को मान्यता देती है तो यात्रियों की संख्या बढ़ने के चांस हैं।

क्या है हाइड्रोजन ट्रेन

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी है। इसे अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) ने विकसित किया है। दावा है कि यह वर्तमान में दुनिया की सबसे लंबी और अधिकतम शक्ति वाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक है। ट्रेन के साथ, हाइड्रोजन को फिर से भरने के लिए एकीकृत हाइड्रोजन उत्पादन-भंडारण-वितरण सुविधा है।

हाइड्रोजन ट्रेन की खासियतें

हाइड्रोजन गैस से चलने वाले ईंजन धुएं के बजाय भाप और पानी छोड़ेंगे। इसमें धुआं नहीं निकलता। दावा किया जाता है एक किलो हाइड्रोजन करीब साढ़े चार लीटर डीजल के बराबर माइलेज देती है। ट्रेन 360 किलो हाइड्रोजन से 180 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इसमें अक्षय ऊर्जा के लिए बैटरी या सुपर कैपेसिटी लगे होते हैं। इंजन में डीजल की जगह फ्यल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन डाली जाएगी। ऑक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी और इस ताप से बिजली पैदा होती है। बिजली लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी, जिससे ट्रेन चलती है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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