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रुलाने वाला है मौसम! मार्च से मई तक देश के अधिकांश हिस्सों में लू का कहर

इस साल मार्च से मई के बीच देश के कई हिस्सों में लू के अधिक दिनों तक रहने की संभावना जताई जा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अपने मासिक पूर्वानुमान में इसे लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दी है। खासतौर पर पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र और कई अन्य क्षेत्रों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।

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मार्च-मई के बीच रह सकता है लू का कहर (सांकेतिक फोटो)

इस साल मार्च से मई के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में लू के अधिक दिनों तक रहने की संभावना जताई जा रही है। यह जानकारी भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अपने मासिक मौसम पूर्वानुमान में शनिवार को दी। आईएमडी के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में पश्चिमी राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिणी और पूर्वी महाराष्ट्र, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, गंगा के मैदान वाले पश्चिमी बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तरी कर्नाटक और उत्तरी तमिलनाडु के कुछ हिस्से शामिल हैं।

आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि मार्च, अप्रैल और मई में लू के सामान्य से अधिक दिनों तक रहने की संभावना सार्वजनिक स्वास्थ्य, जल संसाधनों, बिजली की मांग और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए गंभीर चुनौती पेश कर सकती है। इसका असर विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, खुले में काम करने वाले मजदूरों और पहले से बीमार व्यक्तियों पर पड़ सकता है। हालांकि, मार्च में पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत, पश्चिमी हिमालय के कुछ हिस्सों और मध्य तथा प्रायद्वीपीय भारत को छोड़कर अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने की उम्मीद है।

न्यूनतम तापमान सामान्य स्तर पर रहने की संभावना

इस बीच, उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों, दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्र और पूर्वी तट के कुछ हिस्सों को छोड़कर, देश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य स्तर पर रहने की संभावना है। वहीं कुछ क्षेत्रों में मार्च के दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रह सकता है। आईएमडी के अनुसार, ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि मार्च 2026 में भारत में औसत वर्षा सामान्य रहने की उम्मीद है। 1971 से 2020 तक के रिकॉर्ड के आधार पर, मार्च के लिए दीर्घकालिक औसत वर्षा (LPA) लगभग 29.9 मिमी दर्ज की गई है।

क्या मार्च के महीने में होगी बारिश?

आईएमडी के अनुसार, मार्च में देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है, जबकि उत्तरपूर्वी भारत और उत्तर-पश्चिमी तथा पूर्वी-मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। मौसम विभाग ने बताया कि वर्तमान में भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में ला नीना की स्थिति कमजोर बनी हुई है। हालांकि, वैश्विक मॉडल और आईएमडी की मानसून मिशन जलवायु पूर्वानुमान प्रणाली (MMCFS) के अनुसार, आने वाले महीनों में तटस्थ अल नीनो दक्षिणी दोलन (ENSO) की स्थिति फिर से स्थापित हो सकती है।

फरवरी में ऐसा रहा मौसम का हाल

आईएमडी ने फरवरी माह के मौसम का मूल्यांकन करते हुए बताया कि इस वर्ष भारत में फरवरी में 2001 के बाद सबसे कम वर्षा दर्ज की गई। विभाग के अनुसार, पूरे देश में इस महीने कहीं भी शीतलहर नहीं पड़ी और दिन का तापमान सामान्य से अधिक रहा। मौसम विज्ञान विभाग ने यह भी बताया कि फरवरी में कम बर्फबारी और वर्षा का मुख्य कारण सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का अभाव और पूर्वी हवाओं के साथ इसके अंतर्संबंध/संलग्नता की कमी है।

IMD ने और क्या बताया?

आईएमडी के अनुसार, दक्षिणी प्रायद्वीप और मध्य भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक दर्ज हुआ। इसके अलावा, पूर्वी प्रायद्वीप और पूर्वी-मध्य भारत को छोड़कर अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहा। आईएमडी ने बताया कि 1901 के बाद से उपलब्ध फरवरी के आंकड़ों के आधार पर, 2026 में अधिकतम तापमान के मामले में यह 10वां, न्यूनतम तापमान में तीसरा और औसत तापमान में पांचवां स्थान रखता है।

(इनपुट - भाषा)

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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