Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को राज्य विधानसभा में बताया कि उनकी सरकार ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुई धोखाधड़ी के मामले में करीब 556 करोड़ रुपये वसूल कर लिए हैं। सीएम सैनी ने कहा कि इसमें लगभग 22 करोड़ रुपये का ब्याज शामिल है और यह राशि 24 घंटे के भीतर प्राप्त कर ली गई। आईडीएफसी बैंक ने रविवार को जानकारी दी थी कि उसके कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा हरियाणा सरकार के बैंक खातों से 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी।
सीएम नायब सिंह सैनी ने सदन में क्या कहा?
सीएम नायब सिंह सैनी ने सदन में कहा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हरियाणा सरकार के विभागों से जुड़े सभी पैसे पूरी तरह से हमारे खातों में वापस आ गए हैं और यह वसूली केवल 24 घंटे में पूरी कर ली गई।" उन्होंने आगे बताया कि बैंक ने सरकार को जानकारी दी थी कि इस मामले में मुख्य रूप से चंडीगढ़ की एक विशेष शाखा शामिल थी और धोखाधड़ी में चार से पांच मध्यम एवं निचले स्तर के कर्मचारियों की संलिप्तता पाई गई।
मामले की जांच के लिए समिति का गठन
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि इस मामले में शामिल कोई भी व्यक्ति, चाहे वह बैंक कर्मचारी हो, निजी नागरिक हो या सरकारी अधिकारी हो बख्शा नहीं जाएगा। सीएम सैनी ने सोमवार को बताया था कि राज्य का भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो इस धोखाधड़ी की पूरी जांच करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की जांच के लिए वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है।
सीएम सैनी ने साधा कांग्रेस पर निशाना
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके शासनकाल में घोटालों को दबा दिया जाता था और किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता था, जबकि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख अपना रही है। हरियाणा विधानसभा में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी का मुद्दा विपक्षी दल कांग्रेस ने उठाया था।
(इनपुट - भाषा)
