गुरुग्राम

Best Places to Visit Gurugram: नए साल पर मन्नते मांगने लोग आते हैं 800 वर्ष पुराने बुद्धो माता मंदिर, माता शीतला से है खास नाता

Best Places to Visit Gurugram: फर्रुखनगर इलाके के मुबारिकपुर गांव में स्थित बुद्धो माता का मंदिर का आसपास के क्षेत्रों में माता की बहुत मान्‍यता है। करीब 800 वर्ष पुराने इस प्राचीन मंदिर में नए साल पर लोगों की भीड़ उमड़ती है। मान्‍यता है कि नए साल पर इस मंदिर में मन्‍नत मांगने से वह जरूर पूरी होती है। यही वजह है कि नए साल पर यहां भक्‍तों का तांता लगा रहता है।

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बुद्धो माता का मंदिर

KEY HIGHLIGHTS
  • फर्रुखनगर इलाके के मुबारिकपुर गांव में स्थित है माता बुद्धो का मंदिर
  • माता बुद्धो है माता शीतला की छोटी बहन
  • करीब 800 साल पहले बनाया गया था यह मंदिर


Best Places to Visit Gurugram: गुरुग्राम के फर्रुखनगर इलाके के मुबारिकपुर गांव में स्थित बुद्धो माता का मंदिर बेहद खास है। करीब 800 वर्ष पुराने इस प्राचीन मंदिर में दिल्‍ली-एनसीआर के अलावा राजास्‍थान, यूपी व अन्‍य राज्‍यों के लोग भी आते हैं। इस मंदिर में नए साल पर लोगों की भीड़ उमड़ती है। मान्‍यता है कि नए साल पर इस मंदिर में मन्‍नत मांगने से वह जरूर पूरी होती है। यही वजह है कि नए साल पर यहां भक्‍तों का तांता लगा रहता है। हालांकि यहां आने वालों लोगों को पहले गुरुग्राम शहर में स्थित शीतला माता मंदिर के दर्शन करने होते है। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, माता शीतला बुद्धो माता की बड़ी बहन हैं। इसलिए यहां आने से पहले माता शीतला के दर्शन करना जरूरी है।

गुरुग्राम शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर फर्रुखनगर कसबे के पास स्थित मुबारिकपुर गांव में यह प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। इस मंदिर से एक रोचक कहानी भी जुड़ी है। पौराणिक व लोककथाओं के अनुसार करीब 800 साल पहले मुबारिकपुर गांव को 3 बार बसाया गया था, लेकिन दो बार यह गांव उजड़ गया। तीसरी बार गांव के लोग अपने साथ माता बुद्धो की मूर्ति लेकर आए। डर और भय के बीच ग्रामीण यह तय नहीं कर पा रहे थे कि, मंदिर कहां बनाया जाए और गांव कहां पर बसाया जाए। कहते हैं कि गांव वालों ने अंत में फैसला किया कि मूर्ति को बैलगाड़ी में रख दिया जाए और जहां बैलगाड़ी रूकेगी, वहीं पर मंदिर की स्थापना कर दी जाएगी। घंटों बाद बैलगाड़ी जहां पर रूकी वहीं, मंदिर बनाया गया और इसके ही पास मुबारिकपुर गांव बसा।

साल में चार बार होता है मेले का आयोजन

नए साल पर यहां आने वाले भक्‍त व श्रद्धालु मन्नत मांगते हैं। इसके अलावा यहां पर नवजात शिशु के बाल उतरवाना और नवविवाहित जोड़ों की जात लगाना भी बहुत ही शुभ माना जाता है। मन्‍नते पूरी होने के बाद श्रद्धालु माता के चरणों में लाल चुनरी, नारियल, लड्डू व श्रृंगार का सामान चढ़ाते हैं। यहां पर वर्ष में 4 बार बड़े स्‍तर पर मेले का आयोजन भी किया जाता है। इन मेलों में शामिल होने वाले श्रद्धालु माता को पंखा चढ़ाते हैं।
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