ग्रेटर नोएडा की सोसाइटीज द्वारा बिना ट्रीटमेंट के सीवरेज पानी नालों में बहाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौतम बुद्ध नगर जिले में, यदि कोई सोसाइटी ऐसा करती पाई जाती है तो उसका एओए रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा और भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा। नोएडा प्राधिकरण ने मेरठ स्थित चिटफंड कार्यालय को पत्र लिखकर कुछ सोसाइटीज के रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की सिफारिश की है। अभी तक दो सोसाइटीज पर कार्रवाई की जा चुकी है, जबकि सात और सोसाइटीज की सूची तैयार हो चुकी है। इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।
नोएडा में ड्रेन की सफाई पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद पानी अब भी काला और बदबूदार बना हुआ है। इसकी एक प्रमुख वजह सोसाइटीज द्वारा बिना ट्रीटमेंट के सीवरेज पानी को सीधे नालों में बहा देना है। पहले चरण में सात सोसाइटीज पर कुल 1.17 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस संबंध में नोएडा प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपी पीसीबी) को भी पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है। यह कार्रवाई शहर के जल निकासी और पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम हो सकती है।
इन सोसाइटीज के खिलाफ होगी कार्रवाई
शहर में लगभग 100 सोसाइटीज हैं, जहां लाखों लोग रहते हैं। इनमें से कुछ सोसाइटीज पर विभिन्न कारणों से जुर्माने लगाए गए हैं और कुछ के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उदाहरण के लिए, सेक्टर 100 की लोटस पनाश सोसाइटी पर कार्रवाई प्रस्तावित है, जबकि लोटस बुलेवर्ड पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। सेक्टर 120 की आरजी रेजिडेंसी को 11 लाख 90 हजार रुपये, सेक्टर 78 की सिक्का कर्मिक को 20 लाख 30 हजार रुपये और सेक्टर 137 की पूर्वांचल रॉयल पार्क सोसाइटी को 17 लाख 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसी तरह, सेक्टर 75 की एम्स मैक्स गार्डेनिया को 29 लाख 45 हजार रुपये, सेक्टर 45 की प्रतीक फीडटेक को 18 लाख 30 हजार रुपये और सेक्टर 46 की आम्रपाली सिलिकॉन सिटी को 19 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है।
ड्रेनों की सफाई पर लाखों होते हैं खर्च
नोएडा में ड्रेनों की सफाई पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, फिर भी नाले का पानी काला और दुर्गंधयुक्त बना रहता है। प्रशासन के अनुसार इसका प्रमुख कारण सोसाइटीज द्वारा बिना ट्रीटमेंट के सीवरेज पानी नाले में गिराने का बताया जा रहा है। कई सोसाइटीज चोरी-छिपे सीवरेज पानी को ड्रेन में बहा रही हैं, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। प्रशासन अब इस समस्या के समाधान के लिए कठोर कदम उठाते हुए सोसाइटीज के खिलाफ कारवाई शुरू कर दी है।
