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Agra : जर्जर बस, टूटी सीटें और खिड़कियां, चलती बस से गिरी छात्रा की मौत

यूपी के आगरा में एक निजी स्कूल की बस से गिरकर 9 साल की छात्रा की मौत हो गई। घटना ने स्कूल बसों की फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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आगरा में एक निजी स्कूल की बस से गिरकर 9 साल की छात्रा की मौत

आगरा : जिले में बुधवार को चलती स्कूल बस से गिरकर 9 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई। यह घटना एत्मादपुर थाना क्षेत्र के नगला काले गांव की बताई जा रही है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। बताया जा रहा है कि कक्षा एक में पढ़ने वाली 9 साल की छात्रा नैना स्कूल से छुट्टी के बाद बस से अपने घर लौट रही थी। बस में बच्चों की संख्या भी काफी थी और छात्रा एक सीट पर बैठी हुई थी। अचानक सीट के नीचे का हिस्सा टूटने से नैना चलती बस से नीचे सड़क पर गिर गई। इससे पहले कि ड्राइवर कुछ समझ पाता, बस का पिछला पहिया उसके ऊपर से गुजर गया।

कैसे हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक, बस में मौजूद अन्य बच्चे हादसे को देख जोर-जोर से चिल्लाने लगे। हालांकि, बच्चों के शोर मचाने पर चालक ने बस रोकी और घायल छात्रा को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्कूल बस से बच्चे लाए-ले जाए जा रहे थे, उसकी हालत काफी खराब थी। बस की सीट और फर्श पहले से टूटे हुए थे और उन पर अस्थायी जुगाड़ लगाया गया था। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा के साथ लापरवाही बरत रहा था और जर्जर बस को सड़कों पर दौड़ाया जा रहा था।

घटना के बाद इलाके में गम और आक्रोश का माहौल है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह हादसा एक बार फिर स्कूल बसों की फिटनेस और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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