गाजियाबाद

जल्द ही पूर्वी दिल्ली बॉर्डर के पास वसुंधरा में घर बनाने के लिए आएगी प्लॉट स्कीम, पैसे रखें तैयार

गाजियाबाद के वसुंधरा में पांच हजार लोगों को आवास बसाने का मौका मिलेगा। आवास एंव विकास परिषद ने सेक्टर 7 से 8 की खाली जमीन के 40 एकड़ के लेआउट को मंजूरी दी है। 10 एकड़ में एम्स का सैटेलाइट सेंटर बनेगा, वहीं 30 एकड़ में 20 और 10 एकड़ के दो ग्रुप हाउसिंग भूभागों को प्रस्तावित किया गया है।

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वसुंधरा में पांच हजार लोगों को मिलेगा आवास

अब दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा में रहने वाले लोगों के लिए आवास का सपना सच हो सकता है। वसुंधरा सेक्टर 7 से 8 में सालों से आवास एंव विकास परिषद की तकरीबन 80 एकड़ जमीन खाली पड़ी थी। हालांकि, इसे नए सिरे से बसाने के लिए पहले लखनऊ में हुई बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हुआ था। वहीं सेक्टर 7 में ही एम्स का सैटेलाइट सेंटर बनाने का फैसला कुछ दिनों पहले हुआ था।

बुधवार को लखनऊ में अधीक्षण अभियंता अजय कुमार मित्तल ने एक लेआउट पेश किया, जिसे आवास आयु्क्त ने मंजूरी दे दी है। परिषद के नियम मुताबिक टीओडी जोन में 30 एकड़ के ग्रुप हाउसिंग भूभागों पर लगभग 25 हजार लोग रह सकते हैं। आधिकारियों के अनुसार करीब पांच हजार आवासों को तैयार किया जाएगा। साथ ही इन भूभागों की नीलामी की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी।

स्कूल, अस्पताल और कॉमर्शियल कांप्लेक्स भी बनेंगे

अधीक्षण अभियंता अजय कुमार मित्तल के मुताबिक बड़े ग्रुप हाउसिंग भूभागों की व्यवस्था इस नाते की गई है ताकि सुनियोजित आवासीय योजना बनाई जा सके। हर भूभाग के अंतर्गत आवास के साथ स्कूल, अस्पताल और कॉमर्शियल कांप्लेक्स का भी प्रावधान भी होगा। इससे यहां आवास खरीदने वाले लोगों को हर तरह की सुविधाएं भी मिल सकेंगी। आवास एंव विकास परिषद को इन भूभागों से करीब 1800 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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