गाजियाबाद

PAK के कंधे से कंधा मिलाने वाले तुर्किए की हालत पस्त! गाजियाबाद के व्यापारियों ने दिया 1000 करोड़ का झटका

गाजियाबाद के साहिबाबाद के कारोबारियों ने तुर्किए से फ्रूड प्रोडक्ट नहीं खरीदने का फैसला किया है। वहां से सेब का भी आयात होता था। इस चक्कर में तुर्किए को 1000 करोड़ का झटका लगा है।

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साहिबाबाद के कारोबारी अब तुर्किए से नहीं खरीदेंगे सेब

गाजियाबाद: पाकिस्तान के समर्थन में तुर्किये के खुलकर सामने आने के बाद देश के व्यापारियों में उसके प्रति आक्रोश बढ़ गया है और अब तुर्किए का व्यापारी पक्ष भी विरोध कर रहा है। गाजियाबाद के साहिबाबाद सब्जी मंडी में आज पाकिस्तान के समर्थन में आने पर तुर्किये से सेब का आयात बंद कर दिया है।

तुर्किए को झटका

कारोबार बंद होने से तुर्किए को तगड़ा झटका लगा है। तकरीबन 1,000-1,200 करोड़ रुपये के सेब की खरीद तुर्किये से होती थी, जो अब पूरी तरह बंद हो गई है। पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकी ठिकानों को तबाह किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया। तुर्किए पाकिस्तान के समर्थन में खुलकर सामने आ गया और उसके हथियार पाकिस्तान को दिए जाने का भी खुलासा हुआ। उसके इस रुख से देश के व्यापारियों में काफी आक्रोश है। इसी कड़ी में गाजियाबाद के साहिबाबाद फल के व्यापारियों ने तुर्किए से आने वाले सेबों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।

स्थानीय बाजार से तुर्किए के सेब गायब

इस निर्णय के बाद अब ये सेब स्थानीय बाजारों से गायब हो गए, हैं। इसमें व्यापारियों को नागरिकों का भी साथ मिल रहा है। अब तुर्किए से आयात नहीं किए जा रहे, बल्कि अन्य स्थानों से मंगाए जा रहे हैं। बताया गया है कि फसली सीजन में तुर्किए से लभभग 1,000 से 1,200 करोड़ रुपये के सेब की खरीद की जाती थी।

काराबारियों का ऐलान- हम सेना और सरकार के साथ

गाजियाबाद के साहिबाबाद के फल विक्रेताओं ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान का सपोर्ट करने के लिए हमने तुर्किए के सेबों का बायकॉट करने का फैसला लिया है। फल विक्रेताओं ने आगे कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों से हम व्यापार नहीं करेंगे। वहां से अब सेब के साथ किसी अन्य फल का भी आयात नहीं किया जाएगा। अब हमने हिमाचल या फिर किसी अन्य भारतीय राज्य से सेब खरीदने का फैसला किया है।

आमतौर पर भारत में तुर्किए से हर साल 1,000 से 1,200 करोड़ रुपए के सेब आयात किए जाते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्किए द्वारा पाकिस्तान का समर्थन किए जाने के कारण मार्बल उद्योग ने भी आयात को बायकॉट करने का फैसला किया है। इससे तुर्किए को काफी आर्थिक चोट पहुंच सकती है।

वहीं व्यापारियों का कहना है कि यह केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं है, बल्कि सशस्त्र बलों और सरकार को अपना पूरा समर्थन देने के लिए भी है। जो भी देश पाकिस्तान का समर्थन करेगा हम वहां से आयात और निर्यात दोनों बंद कर देंगे और हम पूरी तरीके से भारत सरकार के साथ हैं और भारतीय सेना के साथ हैं।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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