Rapid Rail Project: देश की पहली रैपिड रेल पटरियों पर उतर चुकी है। इस ट्रेन ने मंगलवार को अपना ट्रायल शुरू कर दिया। पहले दिन यह ट्रेन 25 किमी की स्पीड से पटरी पर दौड़ी। रैपिड रेल का ट्रायल शुरू होने से पहले ही गाजियाबाद से लेकर मेरठ तक कई बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं। सबसे ज्यादा बदलाव रियल एस्टेट के क्षेत्र में आया है। पहले दिल्ली-मरेठ एक्सप्रेसवे और अब गाजियाबाद से मेरठ तक रैपिड रेल प्रोजेक्ट ने पिछले दो साल में मेरठ, मोदी नगर, मुरादनगर, दुहाई और गाजियाबाद के कई इलाकों में रियल एस्टेट में उछाल ला दिया है। जानकारों का कहना है कि, इन क्षेत्रों की संपत्तियों के दाम 35 से 40 फीसदी तक बढ़ गए हैं।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) देश का पहला 82 किलोमीटर दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर बना रहा है। यह एक सेमी हाई स्पीड रेल आधारित ट्रांजिट नेटवर्क है। इस कॉरिडोर के पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद इसमें दो डिपो स्टेशनों सहित 25 स्टेशन होंगे। यह आरआरटीएस कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर मेरठ के मोदीपुरम में समाप्त होगा। इस कॉरिडोर के पहले खंड साहिबाबाद से दुहाई के बीच इस साल मार्च से यात्रा शुरू हो जाएगी। जबकि पूरा कॉरिडोर 2025 तक चालू होगा। जिसके बाद दिल्ली से मेरठ तक मात्र 55 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।
आरआरटीएस कॉरिडोर का सीधा असर रियल एस्टेट मार्केट पर
यह कॉरिडोर जहां यात्रा को सुगम और तेज बनाएगा, वहीं इसका सीधा असर रियल एस्टेट मार्केट पर भी पड़ रहा है। रियल एस्टेट विशेषाज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी परियोजना हमेशा आसपास के क्षेत्र की संपत्ति पर गहरा प्रभाव डालती है। यह कॉरिडोर न केवल हाई स्पीड और आरामदायक यात्रा की सुविधा प्रदान करेगा बल्कि यह इन क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर भी खोलेगा। जल्द ही स्टेशनों के आसपास की जमीनों के दाम में भारी इजाफा देखने को मिलेगा। साथ ही यहां पर आबादी का धनत्व भी बढ़ेगा। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का कहना है कि, आरआरटीएस कॉरिडोर और उत्तर प्रदेश सरकार की हालिया ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट पॉलिसी इन क्षेत्रों के विकास में गेम चेंजर बन रही हैं। जो लोग अब तक दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम जैसी जगहों पर संपत्ति खरीदना चाहते हैं, वे अब मुरादनगर, दुहाई और गाजियाबाद के बाहरी इलाकों में निवेश कर रहे हैं। जिसकी वजह से यहां पर जमीन के दाम बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं।
