गाजियाबाद

Ghaziabad News: 'जय श्री राम' पर आपत्ति, ABES कॉलेज ने महिला प्रोफेसरों को किया सस्पेंड

गाजियाबाद के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र के 'जय श्री राम'बोलने पर उसे महिला प्रोफेसर ने मंच से नीचे उतार दिया। हिंदूवादी लोगों के प्रोफेसर पर कार्रवाई की मांग के बाद कॉलेज प्रशासन ने दोनों प्रवक्ताओं को सस्पेंड कर दिया।

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जय श्री राम'बोलने पर प्रोफेसर ने छात्र को मंच से नीचे उतारा

Photo : ANI

गाजियाबाद: एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज में 'जय श्री राम'बोलने को लेकर जमकर विवाद हो गया। एक कार्यक्रम के दौरान 'जय श्री राम' बोलने पर महिला प्रोफेसर ने छात्र को डांटकर मंच से नीचे उतार दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने पर लोगों की प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है। मामला तूल पकड़ने पर कॉलेज प्रशासन ने महिला प्रोफेसर और उनकी सहयोगी शिक्षिका को निलंबित कर दिया है।

प्रोफेसर छात्र पर हुईं नाराज

दरअसल, गाजियाबाद में ABES इंजीनियरिंग कॉलेज में सांस्कृतिक प्रोग्राम चल रहा था। कॉलेज में हो रहे प्रोगाम के दौरान मंच पर एक छात्र परफॉर्म करने के लिए पहुंचता है। फिर सामने ऑडियंस में बैठे कॉलेज के कुछ छात्रों ने जय श्रीराम बोल दिया। छात्र ने भावना में बहकर जय श्रीराम बोल दिया। इससे कॉलेज की एक प्रोफेसर छात्र पर नाराज होने लगीं। प्रोफेसर मंच के नजदीक पहुंचीं और छात्र को रोकते हुए मंच से जाने के लिए कह दिया।

छात्र ने प्रोफेसर से कहा भी कि पहले ऑडियंस में से किसी ने नारा लगाया था, इसके बाद उसने जवाब में जय श्रीराम बोला है। मामले में ABES कॉलेज प्रबंधन ने जांच के बाद एक्शन लिया है। कॉलेज प्रबंधन के संजय सिंह ने दोनों प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया है। सस्पेंड प्रोफेसर में ममता गौतम और डॉ. स्वेता शर्मा शामिल हैं। अब हिंदूवादी लोग लोग महिला प्रोफेसर पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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