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अगर खरीदने हैं ये विदेशी नस्ल के कुत्ते...तो सोनपुर मेले में वैरायटी; चुकानी होगी इतनी कीमत

बिहार के ऐतिहासिक सोनपुर मेले में कई नस्ल के कुत्ते आकर्षण का केंद्र बने। इनमें से कईयों की कीमत एक लाख तक लगाई गई।

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सोनपुर मेला (फाइल फोटो)

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Sonpeur Mela 2024: विश्व विख्यात हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेले के चिड़िया बाजार में देशी-विदेशी नस्ल के कुत्ते को देखने और खरीदने वालों की भीड़ लग रही है। यह बाजार लोगों के आकर्षण का भी केंद्र बना हुआ है। यहां जर्मन शेफर्ड, लेब्रा, रॉटवेइलर, डोबरमैन, ग्रेडियन, पामेलियन तथा जैलो एंटनी आदि नस्ल के कुत्ते उपलब्ध हैं। विश्व प्रसिद्ध सोनपुर मेले में पशु बाजारों की भी रौनक बढ़ गई है। घोड़ा और बकरी बाजार में खरीद-बिक्री भी शुरू हो चुकी है। हालांकि, कुत्ता बाजार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां चार से पांच हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये के कुत्ते भी उपलब्ध हैं।

इतनी है कुत्तों की कीमत

कुत्ता बाजार में आए उत्तर प्रदेश के दुकानदार खालिद बताते हैं कि लेब्रा नस्ल के कुत्ते 8 से 10 हजार तक में उपलब्ध हैं। पामेलियन की कीमत पांच हजार है, कल्चर पॉम नस्ल का कुत्ता भी बाजार में उपलब्ध है। मेला क्षेत्र में एक विशेष इलाका कुत्तों की बिक्री के लिए आवंटित है, जिसमें बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश से लेकर देश-विदेश की कई नस्लों के कुत्तों के व्यापारी शामिल हैं। यहां कई नस्ल के कुत्ते भी उपलब्ध हैं। सबसे मजेदार बात है कि यहां अपने पसंदीदा कुत्ते का चयन करने के लिए मौका मिलता है, लेकिन कुत्ता खरीदते समय मोलभाव करना जरूरी है।

दुकानदार नसीम बताते हैं कि पिछले साल मेले में भी वह कुत्ता बेचने पहुंचे थे, पिछले साल करीब 200 कुत्ता बेचा था। इस साल विभिन्न नस्ल के 400 कुत्ता लेकर पहुंचे हैं। अभी और कुत्ता आने वाला है। कुछ कुत्ते प्रशिक्षण प्राप्त हैं। गोल्डन रिट्रीवर्स नस्ल के कुत्ते को लोग खास पसंद कर रहे हैं।

कई लोगों का कहना है कि कुत्ता पालने के पहले कई चीजों का ध्यान रखना चाहिए कि अपने घर के अनुसार कुत्ते के नस्ल का चुनाव करना चाहिए। छोटे घर में अगर आप रहते हैं तो शांत नस्ल के कुत्ते को खरीदना चाहिए। जरूरत को ध्यान में रखकर ही ब्रीड का भी चुनाव करना चाहिए।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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