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किसान से जीत नहीं पाया तेंदुआ, ऐसे दी पटखनी की चित हो गया आदमखोर

राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले में एक किसान ने उस पर अटैक करने वाले तेंदुए को कुल्हाड़ी से मारकर खुद की जान बचा ली। हालांकि, तेंदुए के पंजे और दांतों से किसान को गंभीर चोटें आईं हैं।

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किसान ने तेंदुए को मारा (फोटो-AI)

कोटपूतली-बहरोड़ : देशभर के विभिन्न हिस्सों से अधिकतर जंगली जानवरों के हमले की खबरें सामने आती हैं। ज्यादातर मामलों में इंसानों को मौत का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार मामला उल्टा पड़ गया। जी, हां राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले में एक किसान ने उस पर हमला करने वाले तेंदुए को कुल्हाड़ी के वार से मार दिया। अधिकारियों ने बताया कि यह घटना शनिवार सुबह राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले में हुई।

तेंदुआ से लड़ने का तौयार था किसान

जानकारी के मुताबिक, नारायणपुर थाने के खरकड़ी गांव में किसान अपने खेत में काम कर रहा था। इसी दौरान अकेले देखकर तेंदुए ने किसान पर हमला करने का प्रयास किया, लेकिन पहले से मुस्तैद किसान ने खुद को मुकाबला करने के लिए तैयार कर लिया। जैसे ही आदमखोर ने हमला किया, किसान ने तेजी के साथ कुल्हाड़ी से प्रहार किया। फिर भी तेंदुआ हमला करता रहा। इसी दौरान एक कुल्हाड़ी सही ठिकाने पर पड़ने से वह जमीन पर गिर गया। फिलहाल, घायल किसान को अलवर के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज किया जा रहा है।

तेंदुए से संघर्ष करते किसान भी घायल

गांव वालों के अनुसार किसान श्रवण गुर्जर (48) अपनी बकरियों के लिए चारा लेने खेत में गया था। जब वह पेड़ की टहनियां काट रहा था तो पास की झाड़ियों में छिपे तेंदुए के शावक ने उस पर हमला कर दिया। तेंदुए के पंजे और दांतों से किसान को गंभीर चोटें आईं। उन्होंने बताया कि संघर्ष के दौरान किसान ने खुद को बचाने की कोशिश में कुल्हाड़ी से तेंदुए के सिर पर वार किया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

वन विभाग के अधिकारी मनोज नागा ने बताया कि तेंदुए के शव को विभाग के कार्यालय लाया गया है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना की जांच की जा रही है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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