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बेटे की जीत पर छलके अभिजीत की मां के आंसू...बोलीं-रात भर चिंता रहती थी; धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बताया विजय

अभिजीत की मां ने नम आंखों से कहा, 'आज न केवल मेरे बेटे के संघर्ष की, बल्कि देश के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के संयम की जीत हुई है।

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अभिजीत दीपके की मां

नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली के खिलाफ पिछले 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्रों के ऐतिहासिक संघर्ष की आखिरकार जीत हुई है। छात्रों की सबसे बड़ी मांग के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। इस इस्तीफे की खबर सुनते ही छत्रपति संभाजीनगर में पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके के घर पर जश्न और भावुकता का माहौल है। इस्तीफे के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत की मां ने नम आंखों से कहा, 'आज न केवल मेरे बेटे के संघर्ष की, बल्कि देश के लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के संयम की जीत हुई है।' इस बड़ी राजनीतिक घटना ने न केवल शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर किया है, बल्कि जन-आंदोलन की ताकत को भी फिर से सिद्ध कर दिया है।

इधर, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा कि झुकती है 'दुनिया झुकाने वाला चाहिए'। दीपके (Abhijeet Dipke) ने कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र है। हमें डरना नहीं है। क्या कहते थे ये लोग, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। हम कहना चाहते हैं कि झुकती है दुनिया दिखाने वाला चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि जिन बच्चों ने सुसाइड किया है उन परिवार को 1 करोड़ का मुआवजा। दूसरा, ये जो पुलिस वाले गुंडों ने हरकत की थी पुलिस पर एक्शन होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि कॉकरोच से पंगा नहीं लेना का। अभी तो अभी सिर्फ एक का इस्तीफा। अभी कई पुलिसकर्मी भी इस्तीफा देंगे। यह भारत के संविधान की जीत है। यह भारत की जनता की जीत है।

उन्होंने आगे कहा,"मैं एक बहुत महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूं। आज धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से मुझे हीरो मत बनाइए। यह गलती मत कीजिए। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से मुझे हीरो मत बनाइए। एक व्यक्ति को हीरो बनाने से पूरा देश बर्बाद हो गया है।"

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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