Delhi: मुनिरका से चीन तक फैला था ठगी का नेटवर्क, क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो रैकेट के 3 गुर्गों को दबोचा
- Edited by: Nishant Tiwari
- Updated Feb 8, 2026, 02:49 PM IST
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 'ऑपरेशन साइ-हॉक (Cy-Hawk)' के तहत एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए अंतरराष्ट्रीय साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के एक हाई-प्रोफाइल मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस संगठित गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार चीनी हैंडलर्स और अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं।
दिल्ली के बड़े साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ (सांकेतिक चित्र)
Operation Cy-Hawk: दिल्ली क्राइम ब्रांच ने रविवार को ‘साइ-हॉक (Cy-Hawk)’ ऑपरेशन के तहत एक हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े संगठित साइबर-फाइनेंशियल रैकेट में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
कैसे शुरू हुई जांच
इस पूरे रैकेट का खुलासा उत्तम नगर निवासी 56 वर्षीय रंजन की शिकायत के बाद हुआ। पीड़ित रंजन ने आरोप लगाया था कि शेयर बाजार में निवेश के नाम पर उनके साथ करीब 42.5 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू की।
बैंक खातों का जाल और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
पुलिस जांच में पता चला कि ठगी गई रकम को छिपाने के लिए 36 अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था। इस ट्रेल का पीछा करते हुए पुलिस आर.के. पुरम स्थित यूको बैंक की एक शाखा तक पहुंची, जहां से 3.7 लाख रुपये चेक के जरिए निकाले गए थे। यह खाता मुनिरका निवासी सब्बीर अहमद के नाम पर था।
सब्बीर को 21 जनवरी को गिरफ्तार किया गया, जिसने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि वह महज 2 प्रतिशत कमीशन के लिए डमी बैंक खाते खुलवाता था और उनकी पूरी बैंक किट (चेक बुक, सिम कार्ड, पासबुक) मास्टरमाइंड मोहम्मद सरफराज और मोहम्मद दिलशाद को सौंप देता था।
चीनी हैंडलर्स और क्रिप्टोकरेंसी का खेल
सब्बीर की निशानदेही पर पुलिस ने 5 फरवरी को सरफराज और दिलशाद को भी गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों आरोपियों ने कबूल किया कि वे चीनी नागरिकों और उनके एजेंटों के संपर्क में थे। वे ठगी गई रकम को क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदलकर चीनी हैंडलर्स को बेचते थे, जिससे इस रैकेट का अंतरराष्ट्रीय लिंक स्थापित हो गया।
पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने चेक बुक और सिम कार्ड जैसे सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए उनके इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद कर लिए हैं।
डमी खातों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत की जांच
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी डमी लोगों को लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाते थे। इसमें कुछ बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, क्योंकि आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे सीधे बैंक कर्मियों के संपर्क में रहकर तेजी से खाते खुलवाते थे।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (Hindi News) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। शहर (Cities News) अपडेट और चुनाव (Elections) की ताजा समाचार के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से।
