Delhi News: दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में मई माह में एक अभियान के दौरान सात बड़े अंतरराज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोहों का भंडाफोड़ कर 14 कथित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। एक अधिकारी ने शनिवार को जानकारी देते । इस अभियान में कई राज्यों में सक्रिय साइबर अपराध के विभिन्न मॉड्यूल को निशाना बनाया गया, जिनमें फर्जी सरकारी वेबसाइट, एल्गोरिदम आधारित ट्रेडिंग घोटाले, फर्जी मोबाइल एप्लिकेशन, घर से काम करने के नाम पर धोखाधड़ी और ऑनलाइन उपचार रैकेट शामिल थे।
आरोपियों को राजस्थान, पंजाब, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया। इस कार्रवाई में दो करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन से जुड़े धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ और महंगे वाहन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, क्रिप्टोकरेंसी हार्डवेयर वॉलेट, डेबिट कार्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए। प्रमुख मामलों में से एक फर्जी सरकारी पोर्टल परिवहन ऑनलाइन से संबंधित था, जो परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट की कथित तौर पर नकल करता था और वाहन संबंधी सेवाओं की तलाश कर रहे भोले-भाले उपयोगकर्ताओं से भुगतान एकत्र करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
ऑनलाइन आध्यात्मिक उपचार रैकेट का भंडाफोड़
पुलिस ने उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के एमसीए स्नातक अंशुल यादव (24) को गिरफ्तार किया और फर्जी वेबसाइट से जुड़े लैपटॉप, मोबाइल फोन और स्रोत फाइलें बरामद कीं। इस मामले में तीन आरोपियों आईटी इंजीनियर रवि राठौड़, विकास राठौड़ और सुदामा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने उनके पास से एक एसयूवी, कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए। एक अन्य मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर ऑनलाइन आध्यात्मिक उपचार रैकेट संचालित कर रहे थे और व्यक्तिगत व भावनात्मक परेशानियों से जूझ रहे लोगों को अपना शिकार बना रहे थे।
2,000 से अधिक लोगों को बनाया निशाना
आरोपियों ने महिलाओं के फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल कथित तौर पर बनाए, जिन पर उन्होंने मनगढ़ंत पोस्ट किए और उनमें दावा किया गया कि एक स्वघोषित आध्यात्मिक उपचारक ने उनकी समस्याओं का समाधान कर दिया है। इसके बाद पीड़ितों को विशेष अनुष्ठानों, प्रार्थनाओं और तंत्र-मंत्र के लिए रुपये देने के लिए राजी किया गया। चारों आरोपियों गणेश, मनदीप सिंह, अमरनाथ व दीपांशु को पंजाब और राजस्थान से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि इस योजना के तहत 2,000 से अधिक लोगों को निशाना बनाए जाने का संदेह है।
क्या-क्या हुआ बरामद?
एक अन्य आरोपी अभय साहनी (25) को एंड्रॉइड एप्लिकेशन पैकेज (एपीके) विकसित करने और वितरित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। इन एप्लिकेशन की मदद से धोखेबाज पीड़ितों के मोबाइल फोन को दूर से एक्सेस कर सकते थे। अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के पास से एक कार, 11 महंगे मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड और एक क्रिप्टोकरेंसी हार्डवेयर वॉलेट बरामद किया गया। साइबर प्रकोष्ठ ने राजस्थान के पशु चिकित्सा विज्ञान के छात्र अनुज मीणा (20) को भी गिरफ्तार किया। मीणा पर सोशल मीडिया विज्ञापनों के माध्यम से घर से काम करने का लालच देकर लोगों को ठगने का आरोप है।
बैंक खाते से बचत राशि निकालने के आरोप में गिरफ्तारी
इस घोटाले में नौकरी चाहने वालों को निशाना बनाया जाता था और उनसे विभिन्न बहाने बनाकर रुपये ऐंठ लिए जाते थे। एक अन्य मामले में, तीन आरोपियों विशेष सिंह, सचिन मौर्य और आशीष शर्मा ने एक चाय विक्रेता को ऑनलाइन भुगतान एप्लिकेशन का केवाईसी अधिकारी बनकर धोखा देने तथा उसके मोबाइल फोन तक पहुंच प्राप्त कर उसके बैंक खाते से बचत राशि निकालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने 39 वर्षीय देवेंद्र को भी गिरफ्तार किया, जिसने अपने नियोक्ता की याददाश्त की समस्या का फायदा उठाकर पीड़ित के फोन से अनधिकृत यूपीआई लेनदेन किए।
