कॉरपोरेट प्रमोटर विकास गर्ग की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने एडविक लेबोरेट्रीज लिमिटेड के प्रस्तावित राइट्स इश्यू पर अंतरिम एकपक्षीय (Ad-Interim Ex-Parte) रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश के बाद कंपनी की पूंजी जुटाने की प्रक्रिया फिलहाल थम गई है। यह आदेश ऐसे समय आया है, जब विकास गर्ग और उनसे जुड़ी कंपनियां पहले से ही कई कानूनी, आपराधिक और नियामकीय जांचों का सामना कर रही हैं।
अदालत ने यह अंतरिम आदेश कंपनी की 23.46 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली अल्पसंख्यक शेयरधारक फेयरप्लान डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर पारित किया। याचिका में कंपनी प्रबंधन पर धोखाधड़ी, फंड साइफनिंग और गंभीर कॉरपोरेट कुप्रबंधन के आरोप लगाए गए हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में एडविक लेबोरेट्रीज को राइट्स इश्यू से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से रोक दिया है। इसके तहत कंपनी फिलहाल सेबी के समक्ष लेटर ऑफ ऑफर दाखिल नहीं कर सकेगी, शेयरधारकों को ऑफर दस्तावेज जारी नहीं करेगी, सब्सक्रिप्शन प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकेगी, निवेशकों से धनराशि स्वीकार नहीं करेगी और प्रस्तावित राइट्स इश्यू के तहत नए शेयरों का आवंटन भी नहीं कर पाएगी। याचिकाकर्ता का दावा है कि पिछले चार वर्षों में कंपनी प्रबंधन राइट्स इश्यू के जरिए पूंजी जुटाने का चौथा प्रयास कर रहा है, जबकि कंपनी से जुड़े कई विवाद पहले से विभिन्न न्यायिक और नियामकीय मंचों पर लंबित हैं।
हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यह केवल अंतरिम राहत है और प्रतिवादियों, जिनमें विकास गर्ग भी शामिल हैं, को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 22 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।
पहले से कई मामलों में घिरे हैं गर्ग
एडविक लेबोरेट्रीज का यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब विकास गर्ग पहले से कई दीवानी, आपराधिक और नियामकीय मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं। इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट ने जीटीएम बिल्डर्स की शिकायत पर दिल्ली पुलिस को एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) दाखिल करने का निर्देश दिया था। शिकायत में कॉरपोरेट विलय के बाद शेयरों के कथित अनधिकृत हस्तांतरण, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे आरोप लगाए गए हैं।सेबी भी कर चुका है कार्रवाई
वहीं, बाजार नियामक सेबी भी एडविक कैपिटल लिमिटेड से जुड़े मामले में विकास गर्ग और अन्य निदेशकों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। सेबी ने शेयर अधिग्रहण और टेकओवर (SAST) नियमों के तहत आवश्यक खुलासे समय पर नहीं करने और शेयरहोल्डिंग संबंधी सूचनाओं में 234 दिनों तक की देरी पाए जाने पर जुर्माना लगाया था। इसके अलावा, वित्तीय ड्यू डिलिजेंस से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामले में एक विशेष सीबीआई अदालत में भी उनके खिलाफ कार्रवाई जारी है।
अदालत के ताजा आदेश के बाद एडविक लेबोरेट्रीज की पूंजी जुटाने की योजना पर तत्काल असर पड़ा है। अब 22 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर निवेशकों, बाजार नियामकों और कॉरपोरेट क्षेत्र की नजरें टिकी रहेंगी, क्योंकि उसी के बाद यह स्पष्ट होगा कि राइट्स इश्यू आगे बढ़ सकेगा या नहीं।
