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Explained: मानसून बीतने के बाद भी क्यों दिल्ली हुई पानी-पानी; जानें क्या है इस बेमौसम बरसात की वजह

मंगलवार को हुई दिल्ली-NCR में बेमौसम बारिश ने लोगों को चौंका दिया। इससे लगातार बढ़ रही गर्मी को जरूर कम हुई लेकिन इससे लोगों को कुछ परेशानियां भी उठानी पड़ीं। सड़कों के किनारे अपने जलने की राह देख रहे रावण के पुतलों से लेकर दुर्गा पंडाल सब बारिश की चपेट में आ गए। लेकिन मानसून बीतने के हफ्ते भर बाद बारिश कैसे आ गई। तो आइए जानते हैं क्या है इस बारिश का कारण और क्या आगे भी बन रही है संभावना?

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आखिर मानसून के बाद भी क्यों हुई बरसात (चित्र साभार: PTI)

Photo : PTI

Delhi Rain Reason: दिल्ली-NCR के लोगों के लिए मंगलवार की सुबह कुछ अलग थी। पूरे NCR इलाके में सुबह से लेकर दोपहर तक बारिश की एक ओर इस बारिश ने सितंबर की उमस भरी गर्मी से राहत दी, तो दूसरी ओर सड़कों पर जगह-जगह जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। त्योहारी सीजन में भारी भीड़ के बीच यह बेमौसम बारिश दिल्लीवासियों के लिए दोहरी चुनौती लेकर आई। बता दें कि दिल्ली से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 24 सितंबर को हो चुकी है। इस साल मानसून अपने सामान्य समय से एक दिन पहले ही वापस लौट गया। साल 2002 के बाद इस बार सबसे जल्दी मानसून की विदाई हुई है। मानसून के विदा होने के हफ्ते भर बाद भी मंगलवार को दिल्ली में जमकर बारिश हुई।

बेमौसम बरसात के पीछे का कारण

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि यह बारिश किसी एक कारण से नहीं, बल्कि कई मौसमी सिस्टमों के जटिल मेल से हो रही है। दरअसल, अरब सागर के पास कच्छ की खाड़ी (Gulf of Kutch) क्षेत्र में एक वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया यानी निम्न दबाव क्षेत्र बना हुआ है। यह सिस्टम दिल्ली-NCR के मौजूदा मौसम पर असर डालने में अहम भूमिका निभा रहा है।

इस निम्न दबाव क्षेत्र से एक ट्रफ लाइन पूर्व दिशा में दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश तक फैली हुई है। ट्रफ दरअसल वायुमंडल में बनी एक घाटी जैसी निम्न दबाव की पट्टी होती है, जो अक्सर अस्थिर मौसम और बारिश का कारण बनती है। इसके अलावा, एक और ट्रफ लाइन इसी निम्न दबाव केंद्र से उत्तर-पश्चिम राजस्थान की ओर निचले वायुमंडलीय स्तरों में फैली हुई है।

समुद्र से आ रही नमी ने कराई बारिश

IMD के वैज्ञानिकों के अनुसार, इन ट्रफ लाइनों की स्थिति इस समय उत्तरी भारत में बारिश को बढ़ा रही है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर से आने वाली नमी वाली हवाएं उत्तर भारत की ओर आकर आपस में मिल रही हैं। नमी का यह संगम इंडो-गैंगेटिक प्लेन्स (Indo-Gangetic Plains) यानी गंगा के मैदानों में बादल बनने की प्रक्रिया को तेज कर रहा है। जब दो अलग दिशाओं से आने वाली नमी युक्त हवाएं एक साथ मिलती हैं और ट्रफ लाइन के साथ एक लाइन में आती हैं, तब अचानक और तेज बारिश की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है, दोनों दिशाओं से आई नमी ने बादलों को घना और भारी बारिश के लायक बना दिया है।

तो फिर होगी बरसात?

IMD के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक दिल्ली-एनसीआर में बीच-बीच में हल्की से मध्यम बारिश जारी रह सकती है, क्योंकि निम्न दबाव प्रणाली अभी सक्रिय रहेगी। हालांकि, लंबे मानसून जैसी लगातार बारिश की संभावना नहीं है। दो दिन तक बारिश का मौसम बना रहने वाला है। 2 अक्टूबर को भी मौसम विभाग ने हल्की बारिश और बूंदाबांदी की संभावना जताई है। जिसके बाद अगले दो दिन आंशिक तौर पर बादल छाए रहने का अनुमान है।

लंबे समय तक नहीं टिकेगी बारिश

मौसम विभाग ने बताया कि यह बारिश लंबे समय तक नहीं टिकने वाली है। इसकी जगह ये स्थानीय रूप से होने वाली तेज बारिश है। कुछ ही घंटों की बारिश में दिल्ली और आसपास के निचले इलाकों में पानी भर गया और ट्रैफिक की रफ्तार थम सी गई। कई जगहों पर वाहन लंबे समय तक फंसे रहे और ऑफिस व स्कूल जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

सितंबर के ट्रांजिशन मौसम का संकेत

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सितंबर का महीना उत्तर भारत के लिए संक्रमण काल होता है, जब मानसून की वापसी शुरू होती है। इसी दौरान कई बार ऐसे अचानक और तीव्र बारिश के एपिसोड देखने को मिलते हैं। ये घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की क्षेत्रीय मौसम प्रणालियां कितनी आपस में जुड़ी हुई हैं और एक साथ अरब सागर व बंगाल की खाड़ी दोनों से प्रभावित होती हैं।

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Nishant Tiwari
निशांत तिवारी author

निशांत तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में कॉपी एडिटर हैं। शहरों से जुड़ी खबरों, स्थानीय मुद्दों और नागरिक सरोकार को समझने की उनकी गहरी दृ... और देखें

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