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Delhi News: महंगाई ने फिर बिगाड़ा रसोई का बजट, आसमान छूते टमाटर और प्याज के दाम

Vegetable Price Hike: दिल्ली में सब्जियों के दाम एक बार फिर महंगे हो गए है। जिनमें सबसे हाई रेट टमाटर और प्याज का है। महंगाई की वजह को लेकर थोक सब्जी दुकानदार का कहना है कि सब्जियों की मंदी है वहीं खुदरा दुकानदार व्यापार में घाटा बता रहे हैं।

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सब्जियों के बढ़े दाम (फोटो साभार - istock)

Vegetable Price Hike: सब्जियों की महंगाई ने एक बार फिर रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। दिल्ली के लोग सब्जियों के आसमान छूते दामों से परेशान हैं। सीजन की सब्जियों समेत सभी के दाम दोगुने हो गए है। वहीं टमाटर और प्याज ने महंगे दामों में बाजी मारी है। इन दोनों सब्जियों के दाम सबसे अधिक चल रहे हैं। सर्दियों के मौसम में जहां सीजन की सब्जियां जैसे गोभी, गाजर, हरी मटर आदि सस्ते दामों में मिलते हैं, वहीं इस बार इन सब्जियों के भाव नीचे आने का नाम नहीं ले रहे हैं।

ये हैं सब्जियों के नए दाम

पिछले महीने टमाटरों के दाम 30 रुपये किलो थे जो इस महीने बढ़कर 60 रुपये किलो हो गए हैं, वहीं प्याज के दाम 25-30 रुपये किलो से बढ़कर 60-65 रुपये किलो हो गए हैं। सीजन की सब्जियों में गाजर के दाम 30 से बढ़कर 50 रुपये, हरी मेथी के 20 से 30, गोभी 20 से 50 और पालक के दाम 10 से 20 रुपये हो गए हैं। इसके अलावा भिंडी के दाम 30 से 60, बैंगन के 40 से 50, लौकी के 20 से 40, खीरा के 40 से 50 और अदरक के दामों में भी इजाफा हुआ है।

सब्जियों की महंगाई का कारण

सब्जियों के महंगे दामों को लेकर थोक दुकानदार सब्जियों की मंदी को इसकी वजह बता रहे हैं। वहीं खुदरा दुकानदारों का कहना है कि व्यापार में घाटा होने के चलते रेट हाई हुए हैं। थोक सब्जियों के विक्रेताओं का कहना है कि खुदरा सब्जी विक्रेता अपनी मनमर्जी से सब्जियों के दाम तय करके सब्जी बेच रहे हैं, वहीं थोक सब्जी विक्रता तय दाम से अधिक में सब्जियां नहीं बेच सकते, इसलिए थोक और खुदरा दोनों सब्जियों के दामों में अंतर होता है।

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Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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