दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा कोचिंग सेंटर हादसे का मामला, जानें तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत पर अब तक क्या-क्या हुआ

Delhi News: सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली कोचिंग हादसे को लेकर UPSC के प्रतियोगी छात्र ने पत्र याचिका दायर की है। इस याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार और नगर निगम की उदासीनता के चलते 3 छात्रों की मौत हो गई। आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं कि आखिर इस मामले में अब तक क्या कुछ हुआ।

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कोचिंग सेंटर हादसे का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट।

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Old Rajendra Nagar Incident: देश की राजधानी दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर इलाके में हुए हादसे के बाद छात्रों में आक्रोश है। तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत के बाद अब ये मामला सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दिल्ली कोचिंग हादसे पर UPSC के प्रतियोगी छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में पत्र याचिका दाखिल की है। आपको बताते हैं कि याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में क्या कुछ लिखा।

कोचिंग सेंटर हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

ओल्ड राजेंद्र नगर के एक कोचिंग सेंटर के ‘भूतल’ में पानी भर जाने से हुए हादसे में तीन छात्रों की जान चली गई। जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार और नगर निगम की उदासीनता ने 3 छात्रों की जान चली गई। याचिका में आगे इस बात का जिक्र है कि स्वस्थ जीवन जीते हुए पढ़ाई करना किसी भी छात्र का मौलिक अधिकार, जिसका हनन हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट से मौलिक अधिकारों की रक्षा करते हुए उचित कार्रवाई की मांग की गई है।

कोचिंग सेंटर हादसा: छात्र का शव परिजनों को सौंपा

भारी बारिश के कारण यहां एक कोचिंग सेंटर के ‘भूतल’ में पानी भर जाने की वजह से जान गंवाने वाले तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों में से एक, नवीन दलविन का शव सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद उनके परिवार को सौंप दिया गया। अन्य दो छात्रों के शव रविवार को उनके परिजनों को सौंप दिए गए थे। हादसे में तीन अभ्यर्थियों की डूबने से मौत हो गई थी।

दलविन का शव आरएमएल अस्पताल में उनके मामा लिनु राज को सौंप दिया गया। उनके मामा ने कहा, 'हम शाम की उड़ान से उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक स्थान त्रिवेंद्रम ले जाएंगे। हमें घटना के बारे में रविवार सुबह जानकारी मिली।' दलविन जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) से पीएचडी कर रहे थे।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिले दिल्ली के उपराज्यपाल

दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सोमवार को ओल्ड राजेंद्र नगर इलाके का दौरा किया और वहां एक कोचिंग सेंटर की इमारत के 'भूतल' में पानी भरने से तीन सिविल सेवा अभ्यर्थियों की मौत के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत की। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने सक्सेना के सामने अपनी शिकायतें रखीं, जिन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले में कार्रवाई की जाएगी।

ओल्ड राजेंद्र नगर इलाके में शनिवार को भारी बारिश के बाद शनिवार को ‘राव आईएएस स्टडी सर्किल’ के भूतल में पानी भर जाने के कारण सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे तीन अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी। इस घटना में मारे गए छात्रों की पहचान उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की श्रेया यादव (25), तेलंगाना की तान्या सोनी (25) और केरल में एर्नाकुलम के नवीन दलविन के रूप में की गई है।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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