दिल्ली में अप्रैल से कुछ गाड़ियों में फ्यूल नहीं मिलेगा। सरकार ने ये फैसला इसलिए लिया है ताकि दिल्ली में वायु प्रदूषण में कमी आ सके। हालांकि, ये फैसला 1 अप्रैल से ही लागू होना था लेकिन कुछ फ्यूल स्टेशनों पर कुछ काम बाकी रह गए थे। अब दिल्ली सरकार ने इस फैसले को अप्रैल के मध्य से लागू करने का फैसला किया है।
अप्रैल के मध्य से होगा लागू
सोमवार को दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार अब दिल्ली में पुराने गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल न देने का फैसला अप्रैल माह से ही लागू होगा। कुछ स्थानों पर अभी भी आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं, इसे जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसे लागू करने में 10-15 दिन और लगेंगे। सिरसा ने मार्च की शुरुआत में घोषणा की थी कि 1 अप्रैल से राजधानी भर के रिफिल स्टेशनों पर पुराने वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा।
किन गाड़ियों को नहीं मिलेगा फ्यूल
ये नियम उन गाड़ियों पर लागू होगा जिनकी अवधि पूरी हो चुकी है। गाड़ियों की अवधि उनमें इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन पर निर्भर करती है। 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल वाहन और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को दिल्ली में चलने की अनुमति नहीं है। ये ओवरएज गाड़ियां या एंड ऑफ लाइफ व्हीकल (ELV) कहलाती हैं। पिछले दो सालों से ऐसी गाड़ियों को NCR क्षेत्रों में बेचने की अनुमति न मिलने पर सीज कर के स्क्रैप किया जा रहा है। अब सरकार ने ऐसी गाड़ियों में ईंधन न देने का फैसला किया है।
कैसे होगी गाड़ियों की पहचान
इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने फ्यूल स्टेशनों पर ऑटोमेटिक कैमरे और नंबर प्लेट की पहचान करने के लिए सिस्टम लगवाया है। ये सिस्टम परिवहन विभाग के डेटा से जोड़ा जाएगा। पेट्रोल-डीजल लेने आने वाले वाहनों के नंबर प्लेट को स्कैन करके ये पता लगाया जाएगा कि गाड़ी ELV तो नहीं है। अगर गाड़ी ओवरएज है तो एक अलार्म बजेगा। ये पूरी प्रक्रिया फास्ट टैग सिस्टम जैसे काम करेगी।
दिल्ली में लगभग 600 फ्यूल स्टेशन हैं, जिनमें से करीब 450 स्टेशनों पर ये सिस्टम इंस्टॉल कर दिया गया है।
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