Mobile Gaming Addiction: मोबाइल गेमिंग की लत बच्चों और किशोरों के लिए गंभीर मानसिक और सामाजिक समस्याएं पैदा कर रही है, जो उन्हें हिंसा और आत्मघात जैसी खतरनाक राहों की ओर ले जा रही है। हाल ही में दिल्ली के नांगलोई इलाके में सामने आई एक घटना ने इस समस्या की भयावहता को एक बार फिर उजागर किया है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2021 में मोबाइल गेमिंग से जुड़ी बढ़ती घटनाओं को ध्यान में रखते हुए एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार को इसके लिए एक राष्ट्रीय नीति तैयार करने के निर्देश दिए थे। बावजूद इसके, हाल के वर्षों में इस लत के कारण आत्महत्या और हिंसा की कई चौंकाने वाली घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
उदाहरण के लिए, 31 जुलाई 2025 को मध्य प्रदेश के इंदौर में 12 वर्षीय बच्चे ने गेम खेलते समय आत्महत्या कर ली। मार्च 2024 में पटना में एक छात्र ने ऑनलाइन गेम में पैसे की जरूरत के चलते खुद के अपहरण का नाटक किया। अगस्त 2021 में छतरपुर में 13 वर्षीय बालक ने 40,000 रुपये मोबाइल गेमिंग में गंवाने के बाद आत्महत्या कर ली। वहीं जून 2022 में लखनऊ में 16 वर्षीय लड़के ने अपनी मां की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी क्योंकि उसने उसे गेम खेलने से रोका था।
इन घटनाओं से साफ है कि मोबाइल गेमिंग की लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन पर विनाशकारी असर डाल रही है। समय की मांग है कि सरकार, समाज और अभिभावक मिलकर इस बढ़ती समस्या के समाधान के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएं।
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