दिल्ली

आरएसएस, एबीवीपी, बीजेपी... 10 पॉइंट में जानिए कैसा रहा रेखा गुप्ता का मुख्यमंत्री बनने तक का सफर

Rekha Gupta's Political Journey: पहले RSS, इसके बाद ABVP और फिर BJP... एक कार्यकर्ता से राजधानी के मुख्यमंत्री तक रेखा गुप्ता का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने आरएसएस और छात्र राजनीति से होते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने तक का सफर तय किया है। आपको उनके सफर से जुड़ी 10 अहम बातें इस रिपोर्ट में बताते हैं।

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रेखा गुप्ता का मुख्यमंत्री बनने तक का सफर कैसा रहा?

Delhi New Chief Minister Rekha Gupta: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की पूर्व अध्यक्ष और पहली बार विधायक बनीं रेखा गुप्ता दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रही हैं, जिन्होंने राजधानी में महिला कल्याण के लिए काफी काम किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से लंबे समय से जुड़ी 50 वर्षीय रेखा हाल में संपन्न दिल्ली विधानसभा चुनाव में शालीमार बाग से विधायक निर्वाचित हुई हैं। उन्हें बुधवार को पार्टी विधायक दल का नेता चुना गया। पार्टी 26 साल से अधिक समय के बाद दिल्ली की सत्ता में लौटी है, जिसने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी के 10 साल के शासन को समाप्त कर दिया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से बीकॉम

हरियाणा के जुलाना में जन्मी गुप्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज से बीकॉम स्नातक हैं। बाद में उन्होंने मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की और एक वकील के रूप में भी काम किया।

पिछले 32 साल से आरएसएस से जुड़ीं हैं रेखा गुप्ता

आरएसएस से पिछले 32 साल से जुड़ीं रेखा ने 1992 में दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलतराम कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी।

1996-97 में दिल्ली विश्वविद्यालय की अध्यक्ष चुनी गईं

रेखा गुप्ता 1995-96 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की सचिव बनी थीं और 1996-97 में डूसू अध्यक्ष चुनी गईं।

भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं रेखा

वह 2002 में भाजपा में शामिल हो गईं और पार्टी की युवा शाखा की राष्ट्रीय सचिव रहीं। गुप्ता ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भाजपा की महिला शाखा की प्रभारी के रूप में भी काम किया है। वह भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं।

महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए किया काम

साल 2007 में उत्तर पीतमपुरा से पार्षद चुने जाने के बाद, गुप्ता ने महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए काम किया। उन्होंने सुमेधा योजना जैसी पहल शुरू कीं, जिसने आर्थिक रूप से कमजोर छात्राओं को उच्च शिक्षा हासिल करने में मदद की।

शालीमार बाग से साल 2022 में चुनी गईं पार्षद

वह इस सीट (पीतमपुरा) से 2007-2012 और 2012-17 में तथा शालीमार बाग से 2022-25 में पार्षद चुनी गईं। दिल्ली नगर निगम की महिला कल्याण एवं बाल विकास समिति की प्रमुख के रूप में उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम किया।

दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री बनने जा रहीं रेखा

दिल्ली विधानसभा में सदन की नेता के रूप में वह सुषमा स्वराज, शीला दीक्षित और आतिशी के बाद दिल्ली की चौथी महिला मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं। साथ ही, वह मदन लाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज के बाद दिल्ली में भाजपा की चौथी मुख्यमंत्री होंगी।

देश में भाजपा की एकमात्र महिला मुख्यमंत्री होंगी रेखा गुप्ता

रेखा गुप्ता के नाम एक और अनोखा रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा। शपथ ग्रहण के बाद, वह वर्तमान में भाजपा शासित किसी भी राज्य में एकमात्र महिला मुख्यमंत्री होंगी।

सीएम की कुर्सी को लेकर क्या बोलीं रेखा गुप्ता?

वह मुख्यमंत्री के रूप में अपने मंत्रिपरिषद के साथ बृहस्पतिवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में रामलीला मैदान में एक भव्य समारोह में शपथ लेंगी। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यह जिम्मेदारी देने के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने दिल्ली के हर निवासी के कल्याण, सशक्तीकरण और समग्र विकास के लिए काम करने का वादा किया।

AAP की बंदना कुमारी को रेखा गुप्ता ने हराया

दिल्ली में पांच फरवरी को हुए विधानसभा चुनाव में गुप्ता ने शालीमार बाग सीट पर आम आदमी पार्टी की अपनी प्रतिद्वंद्वी बंदना कुमारी को 29,000 से अधिक मतों से हराया। वह 2015 और 2020 के चुनावों में कुमारी से हार गई थीं।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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