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दिल्ली मेट्रो में शराब ले जाने वाले यात्री ध्यान दें...! DMRC ने कर दिया अब ये बड़ा ऐलान; जान लें नियम

Delhi News: दिल्ली मेट्रो में शराब लेकर यात्रा करने वालों के लिए जरूरी जानकारी सामने आई है। डीएमआरसी ने साफ शब्दों में ये कहा है कि मेट्रो ट्रेन में शराब ले जाने वाले यात्री आबकारी नियमों के प्रति सावधान रहें। आपको बताते हैं कि उन्होंने किन नियमों के लिए लोगों को सचेत किया है।

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दिल्ली मेट्रो में शराब ले जाने वाले सावधान!

Delhi Metro Liquor Rule: दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने कहा है कि दिल्ली मेट्रो में यात्रियों को शराब की दो सीलबंद बोतलें ले जाने की अनुमति दिए जाने के मामले में संबंधित राज्य के आबकारी नियम लागू होंगे। डीएमआरसी ने पिछले साल जून में मेट्रो ट्रेनों में प्रति व्यक्ति शराब की दो सीलबंद बोतलें ले जाने की अनुमति दी थी, जिस पर दिल्ली सरकार ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह आबकारी नियमों के खिलाफ है।

आबकारी नियमों को लेकर क्या बोली डीएमआरसी?

मेट्रो ट्रेन राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में चलती हैं, जो दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा में फरीदाबाद, गुरुग्राम और उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) जैसे शहरों को भी जोड़ती हैं। डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक विकास कुमार ने कहा, 'दिल्ली सरकार ने हमें जो भी अधिकृत किया है, उसकी अनुमति है। उस राज्य के आबकारी नियम लागू होते हैं।'

'एक से दूसरे राज्य में एक सीलबंद बोतल ही जा सकती है'

आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आबकारी अधिनियम के अनुसार रम, वोदका और व्हिस्की जैसी शराब की केवल एक सीलबंद बोतल ही एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाई जा सकती है। अधिकारी ने कहा कि मेट्रो ट्रेन दिल्ली और एनसीआर के शहरों जैसे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच यात्रियों को ले जाती हैं और किसी भी व्यक्ति को दो सीलबंद बोतलें ले जाने की अनुमति देना अधिनियम का उल्लंघन होगा।

'राज्य का जो भी आबकारी कानून है, वह लागू होगा'

डीएमआरसी के मुख्य कार्यकारी निदेशक अनुज दयाल ने कहा, 'हम एक या दो बोतलों की संख्या के बारे में नहीं बता रहे हैं। चूंकि हम दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में काम कर रहे हैं और राज्य का जो भी आबकारी कानून है, वह लागू होगा।' डीएमआरसी ने कहा कि मेट्रो ट्रेन के यात्रियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सीमा पार परिवहन के दौरान शराब ले जाने के संबंध में संबंधित राज्य आबकारी विभाग के मौजूदा नियमों और विनियमों का पालन करें।

'शराब की दो बोतलें लेकर ट्रेन में चढ़ता है यात्री तो...'

उन्होंने कहा, 'अगर कोई यात्री दिल्ली से शराब की दो बोतलें लेकर ट्रेन में चढ़ता है और उत्तर प्रदेश की ओर जा रहा है तो उसे समझ लेना चाहिए कि उस राज्य के आबकारी नियमों के मुताबिक उसके पास दो बोतलें हैं। इसलिए अगर शराब की सिर्फ एक बोतल की अनुमति है तो उसे सिर्फ एक ही बोतल लेकर चलना चाहिए।'

दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग ने पिछले साल मेट्रो ट्रेन में यात्रियों को शराब की दो सीलबंद बोतलें ले जाने की अनुमति देने के बाद डीएमआरसी को नोटिस भेजा था। इससे पहले, एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन को छोड़कर दिल्ली मेट्रो ट्रेन में शराब ले जाने पर प्रतिबंध था।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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