दिल्ली

Delhi: मच्छर प्रजनन पर जुर्माना अभी भी 500 रुपये, 50 साल से नहीं बढ़ी राशि; कार्रवाई सीमित

दिल्ली में मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए चालान व्यवस्था पिछले 50 वर्षों से बिना बदलाव के लागू है, जिसकी अधिकतम राशि अब भी 500 रुपये है। महंगाई और समय के साथ इसका प्रभाव घटता जा रहा है, जिससे मच्छर रोधी अभियान प्रभावित हो रहा है। नगर निगम अब जुर्माने की राशि बढ़ाने की दिशा में नई सरकार से ठोस निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं।

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मच्छर प्रजनन पर जुर्माना अभी तक 500 रुपये (सांकेतिक फोटो: Canva)

Delhi Mosquito Breeding: दिल्ली में मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए चालान शुल्क की व्यवस्था करीब 50 साल पुरानी है। वर्ष 1975 में यह राशि अधिकतम 500 रुपये निर्धारित की गई थी, जो अब तक अपरिवर्तित बनी हुई है। इस दौरान महंगाई और रुपये के अवमूल्यन के बावजूद जुर्माने की राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई, जिससे लोगों में इसका डर कम हो गया है।

हर साल नगर निगम हजारों ऐसे स्थानों की पहचान करता है, जहां मच्छरों का प्रजनन होता है, जो डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। निगम अधिकारियों का मानना है कि चालान राशि बहुत कम होने से मच्छर रोधी अभियान असरदार साबित नहीं हो पा रहा है।

साल 2019 में दिल्ली के तीनों नगर निगमों ने चालान राशि को बढ़ाकर 50,000 रुपये तक करने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन उसे स्वीकृति नहीं मिली। अब नई सरकार से इस दिशा में निर्णायक कदम की उम्मीद की जा रही है। पिछली सरकार ने भी इसे लागू करने की बात कही थी, लेकिन चुनावी साल होने के चलते इसे टाल दिया गया।

बीते वर्ष निगमों ने दिल्ली में 2.44 करोड़ बार घरों और परिसरों की जांच की, जिनमें से 99,998 जगहों पर मच्छरों का प्रजनन पाया गया। इसके तहत 76,669 लोगों को कानूनी नोटिस भेजे गए और 14,866 के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। चालान की कार्रवाई केवल 3,688 मामलों में हुई, जिससे कुल 11.17 लाख रुपये की वसूली की जा सकी।

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Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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