दिल्ली

पॉलीमेटेक इलेक्ट्रॉनिक्स पर डिफॉल्ट का आरोप, NCLT ने दिया 157.20 करोड़ मामले में दिया नोटिस

चेन्नई में स्थित पॉलीमेटेक इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के खिलाफ दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना के साथ गंभीर वित्तीय विवाद उभर आया है। ऑपरेशनल क्रेडिटर्स (संचालन संबंधी देनदार) ने कंपनी पर ₹157.20 करोड़ के बकाया भुगतान न करने का आरोप लगाते हुए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), चेन्नई में याचिका दायर की है।

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Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

मीडिया खबरों के मुताबिक, परिचालन लेनदारों द्वारा दिवालियापन और दिवालिया संहिता (आईबीसी) के तहत दायर याचिका में कंपनी के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई है। अब इस मामले की सुनवाई 26 मार्च 2026 को होगी।

एनबीटी और दैनिक जागरण के हवाले से क्रेडिटर्स का दावा है कि कंपनी ने एडवाइजरी सेवाओं की फीस तथा इक्विटी कमिटमेंट्स के भुगतान में डिफॉल्ट किया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार कंपनी ने कई बार भुगतान का आश्वासन तो दिया और कुछ आंशिक भुगतान भी किया, लेकिन शेष बकाया राशि का निपटारा नहीं किया गया। इसी के आधार पर कोर्ट में अपील की गई है।

ऑपरेशनल क्रेडिटर्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी. बालासुब्रमण्यम के साथ अधिवक्ता आदित्य भारत मनुबरवाला और अमोघ सिम्हा ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर की। उन्होंने नोट किया कि जनवरी 2025 में भेजे गए डिमांड नोटिस का कंपनी की ओर से औपचारिक जवाब नहीं मिला। हालांकि कंपनी ने बकाया राशि का एक हिस्सा भुगतान कर अपनी देनदारी स्वीकार की है।

ट्रिब्यूनल ने इस मामले में कंपनी को नोटिस जारी किया है, जिसे कंपनी की ओर से अधिवक्ता रोशन ने स्वीकार कर लिया है। अगली सुनवाई 26 मार्च 2026 को नियत की गई है, जब मामले पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

यदि ट्रिब्यूनल इस याचिका को स्वीकार कर लेता है, तो कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू हो सकता है। इस प्रक्रिया के तहत एक इंटरिम रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त किया जाएगा, जो कंपनी के प्रबंधन तथा संचालन की निगरानी करेगा और कंपनी को संबल देने के उपाय तलाशेगा। यह मामला न केवल कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उत्पादन क्षेत्र में निवेशकों तथा बाजार सहभागियों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। बिगड़ते आर्थिक संकेत और अनुशासनहीनता के आरोप कंपनी की प्रतिष्ठा तथा भविष्य पर प्रभाव डाल सकते हैं।

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Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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