Monsoon Withdrawal: दिल्ली में इस साल बरसात का मौसम आधिकारिक तौर पर खत्म हो चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, राजधानी से बुधवार को मानसून की वापसी हो गई। दिल्ली से मानसून की विदाई 25 सितंबर को होती है। हालांकि, इस बार राजस्थान से 14 सितंबर को ही इसकी वापसी शुरू हो चुकी थी और अब यह उत्तर भारत के बाकी हिस्सों से तेजी से लौटते हुए दिल्ली से भी एक दिन पहले ही विदा ले चुका है।
बारिश में ‘ओवरअचीवर’ रही दिल्ली
दिल्ली के लिए यह मानसून बेहद खास रहा। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस मानसून सीजन में दिल्ली में सामान्य से 41% अधिक बारिश दर्ज की गई है। सफदरजंग मौसम केंद्र ने जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर, चारों मानसूनी महीनों में औसत से अधिक वर्षा दर्ज की, जो सामान्य बात नहीं है। दिल्ली में हर बरसात के मौसम में औसतन 640.4 मिमी बारिश होती है लेकिन इस साल दिल्ली में कुल 902.6 मिमी बारिश हुई।
पिछले साल भी हुई थी पर्याप्त बारिश
पिछले साल भी दिल्ली में पर्याप्त बारिश हुई थी, साल 2024 में कुल 1029.9 मिमी बारिश हुई थी, जो अब तक की सातवीं सबसे अधिक मानसूनी बारिश रही थी। 2010 से अबतक देखें तो दिल्ली में अबतक चार बार 1000 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिनमें 2021 सबसे अधिक वर्षा वाला साल रहा, जब 1176.4 मिमी बारिश हुई थी। वहीं, 2014 में सबसे कम 307.8 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।

इस साल खूब बरसे बादल (तस्वीर साभार : PTI)
टूटे कई रिकॉर्ड
मई से देखें तो सालाना बारिश के 1000 के आंकड़े को दिल्ली पहले ही पार कर चुकी है। सिर्फ सितंबर में 136.1 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 123.5 मिमी से अधिक है। मई में भी सामान्य 30.7 मिमी के मुकाबले 186.4 मिमी की रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई।
जून में 107.1 मिमी, जुलाई में 259.3 मिमी और अगस्त में 400.1 मिमी बारिश हुई, जो पिछले 15 सालों में अगस्त की सबसे अधिक बारिश है। यह 72% की भारी बढ़त इस साल तीन दिन भारी बारिश के रहे, 29 जुलाई को 68.1 मिमी, 9 अगस्त को 79 मिमी और 15 अगस्त को 79.4 मिमी बारिश हुई।
जिले के हिसाब से देखें तो मध्य दिल्ली में सबसे अधिक 950 मिमी बारिश हुई, जबकि दक्षिणी दिल्ली में सबसे कम 550.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो फिर भी न्यूनतम सीमा से ऊपर रही। इस साल किसी भी जिले में कम बारिश नहीं हुई है।

आने लगे पराली जलाने के मामले (सांकेतिक तस्वीर)
प्रदूषण का क्या है हाल
लगे हाथ उस चीज की भी चर्चा कर लेते हैं जिसकी बात बरसात बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। हम बात कर रहे हैं हवा के प्रदूषण की। बरसात खत्म होते ही पराली जलाने के मामले भी बढ़ जाते हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक 15 से 21 सितंबर के बीच पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से 64 घटनाएं दर्ज हुईं। पिछले साल इस समय 71 मामले आए थे। हालिया सालों पर नजर डालें तो 2023 में 17, 2022 में 108, 2021 में 28 और 2020 में पराली जलाने के 200 केस रिपोर्ट हुए थे। अभी दिल्ली की हवा ज्यादा खराब नहीं हुई है। सोमवार को AQI 127 रहा, जो ‘मॉडरेट’ श्रेणी में आता है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, 25 सितंबर तक हवा की गुणवत्ता इसी श्रेणी में बनी रहेगी। हालांकि, आगे पराली जलाने की घटनाएं बढ़ीं तो प्रदूषण का स्तर और बिगड़ सकता है।
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