दिल्ली में इस बार मानसून के लिए तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। दावा था कि पिछले वर्षों की तरह इस बार हालात नहीं होंगे। नालों की सफाई समय पर कर दी जाएगी और जहां जलजमाव की समस्या होती है, वहां पर पंप लगाकर पानी को रुकने नहीं दिया जाएगा। लेकिन सावन के पहले ही दिन दक्षिण दिल्ली में मानसूनी बारिश ने कई क्षेत्रों को तालाब में बदल दिया।
आज यानी शुक्रवार 11 जुलाई की सुबह हुई बारिश के कारण तुगलकाबाद गांव, संगम विहार, देवली, सैनिक फार्म, फतेहपुरी बेरी, आयानगर, सुल्तानपुर जैसे कई इलाकों में पानी भर गया। मजेदार बात ये है कि ये इलाके साल भर पीने योग्य पानी के लिए तरसते रहते हैं, लेकिन बरसात के मौसम में इतना पानी सड़कों और गलियों में भर जाता है कि लोगों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। आज सावन का पहला दिन है, जलजमाव के कारण लोगों को सुबह मंदिर जाने में भी दिक्कत हुई।
तुगलकाबाद गांव में केंद्रीय विद्यालय के सामने घटने से ऊपर तक पानी भर गया। यह स्थिति दिल्ली सरकार के जल भराव से निबटने के दावों की पोल खोलती है। क्षेत्र से सांसद रावनीर सिंह बिधूड़ी के क्षेत्र में यह स्थिति और भी चिंताजनक नजर आयी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ेक दिन पहले ही अधचिनी गांव में एक कार्यक्रम में कहा था कि जल निकासी की व्यवस्था सालों से ध्वस्त थी। साथ ही उन्होंने बताया कि मानसून से पहले कई सुधारात्मक काम किए गए हैं, जो अब भी जारी हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया था कि कुछ कमियां अभी हैं, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में दिल्लीवासियों को जलजमाव की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस मानसून में तो मुख्यमंत्री अपने वादों और दावों पर फिलहाल खरी उतरती नहीं दिख रही हैं, उम्मीद है अगले साल दिल्लीवालों को मानसून में जलजमाव की समस्या से मुक्ति मिल जाए।
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