JNUSU Election Result 2025: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ चुनाव के परिणाम घोषित हो गए हैं, जिनमें वामपंथी समर्थित छात्र संगठनों ने केंद्रीय पैनल की सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की है। इस बार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को एक भी सीट नहीं मिली, जबकि पिछले वर्ष वह एक सीट जीतने में सफल रही थी। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला वामपंथी संगठनों और एबीवीपी के बीच देखने को मिला।
परिणामों के अनुसार, अध्यक्ष पद (President) पर अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष पद (Vice President) पर कीझाकूट गोपिका बाबू, महासचिव पद (General Secretary) पर सुनील यादव, और संयुक्त सचिव पद (Joint Secretary) पर दानिश विजयी रहे। जेएनयू में छात्रसंघ चुनावों के लिए मतदान 4 नवंबर को संपन्न हुआ था। गुरुवार सुबह से ही आए शुरुआती रुझानों में वाम समर्थित उम्मीदवारों ने बढ़त बनाए रखी थी। हालांकि एक समय पर एबीवीपी के कुछ उम्मीदवारों ने मामूली बढ़त हासिल की, लेकिन अंतिम नतीजों में सभी चार सीटों पर वामपंथी गठबंधन ने निर्णायक जीत दर्ज की।
इन पदों पर जीत हासिल
वामपंथी छात्र संगठनों ने इस बार जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में सभी प्रमुख पद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव पर जीत हासिल की है। कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी चुनाव में भाग लिया, लेकिन वह किसी भी सीट पर मुख्य मुकाबले में नहीं पहुंच सका और उसे करारी हार का सामना करना पड़ा। इस वर्ष वाम संगठनों ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा। एसएफआई, आइसा और डीएसएफ जैसे प्रमुख वाम छात्र संगठनों ने रणनीतिक गठबंधन बनाकर संयुक्त रूप से मैदान में उतरने का फैसला किया था। कई वर्षों बाद इन संगठनों का यह साझा मोर्चा देखने को मिला।
ऐसे जीता छात्रोंं का दिल
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में वाम गठबंधन के उम्मीदवारों ने सभी प्रमुख पदों पर जीत हासिल की। अदिति मिश्रा, जो PhD (CCPPT, SIS) की छात्रा हैं, ने अध्यक्ष पद पर भारी मतों से विजय प्राप्त की। वह अपनी तेजतर्रार बहसों और समावेशी राजनीति के लिए जानी जाती हैं। उपाध्यक्ष पद पर कीझाकूट गोपिका बाबू, PhD (CSLG, SSS), ने जीत दर्ज की। उन्होंने महिला सुरक्षा और कैंपस में लोकतांत्रिक वातावरण बहाल करने को लेकर प्रभावी अभियान चलाया था। महासचिव पद पर सुनील यादव, PhD (CSA, SIS), ने जीत हासिल की। उन्होंने रोजगार, छात्रवृत्ति और हॉस्टल सुविधाओं से जुड़े ठोस मुद्दों को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुखता दी। वहीं संयुक्त सचिव पद पर दानिश अली, PhD (CHS, SSS), विजयी रहे। उन्होंने सामाजिक न्याय और शिक्षा के लोकतांत्रिक अधिकारों पर केंद्रित अभियान के जरिए छात्रों का विश्वास जीता।
एबीवीपी को मिली वाम दल से मात
वामपंथी गठबंधन की ओर से अदिति मिश्रा को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया था, जिन्होंने चुनाव में निर्णायक जीत दर्ज की। मतगणना के शुरुआती रुझानों से ही अदिति मिश्रा अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे चल रही थीं और अंततः उन्होंने अध्यक्ष पद पर स्पष्ट बढ़त बनाए रखी। उपाध्यक्ष पद पर वामपंथी उम्मीदवार कीझाकूट गोपिका बाबू ने जीत दर्ज की, जबकि सुनील यादव ने महासचिव पद पर विजय हासिल की। मतगणना के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवार राजेश्वर कांत दुबे मामूली अंतर से आगे हो गए थे, लेकिन बाद में वाम समर्थित प्रत्याशी ने बढ़त वापस हासिल करते हुए उन्हें मात दी।
विश्वविद्यालय में करीब 67 प्रतिशत मतदान हुआ
संयुक्त सचिव पद पर भी वामपंथी उम्मीदवार दानिश अली ने जीत हासिल की। चुनाव परिणामों के बाद वाम समर्थित छात्र संगठनों ने इसे अपनी विचारधारा की जीत बताया। उनका कहना है कि जेएनयू के छात्रों ने एक बार फिर एबीवीपी के वैचारिक दृष्टिकोण को नकारते हुए प्रगतिशील राजनीति को चुना है। सभी चार पदों की मतगणना पूरी हो चुकी है और अंतिम परिणाम घोषित कर दिए गए हैं। इस साल जेएनयू में छात्रसंघ चुनाव के लिए कुल आठ मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। मतदान मंगलवार को दो चरणों में संपन्न हुआ। पहली पाली में मतदान दोपहर 1 बजे तक चला, जबकि दूसरी पाली की शुरुआत दोपहर 2:30 बजे से हुई। इन चुनावों में विश्वविद्यालय के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव सहित विभिन्न संकायों के काउंसलर पदों के लिए मतदान किया गया। कुल 9,043 छात्र मतदाता सूची में पंजीकृत थे। हालांकि, इस बार विश्वविद्यालय में करीब 67 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम रहा।
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