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इंद्रप्रस्थ से दिल्ली तक...महाभारत की नगरी कैसे बनी देश की राजधानी? जानें इसके नाम की कहानी

भारत की राजधानी दिल्ली न सिर्फ सत्ता का केंद्र है, बल्कि इतिहास, संस्कृति और सभ्यता का संगम भी है। महाभारतकालीन इंद्रप्रस्थ से लेकर आधुनिक दिल्ली तक, इस शहर ने अनेक युगों का उत्थान और परिवर्तन देखा है। हर दौर में इसका नाम, रूप और महत्व बदलता रहा, लेकिन इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव सदैव अमर रहा।

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इंद्रप्रस्थ से दिल्ली तक, इसके नाम का इतिहास क्या है?

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

History of Delhi Name: दिलवालों का शहर, भारत की राजधानी और विश्व के सबसे लोकप्रिय नगरों में से एक — दिल्ली बेहद खास है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, दिल्ली का प्राचीन नाम इंद्रप्रस्थ बताया जाता है। वही नगर जिसका उल्लेख महाभारत में मिलता है। यह पांडवों की समृद्ध राजधानी थी, जिसे यमुना नदी के किनारे बसाया गया था। कई इतिहासकारों का मत है कि वर्तमान दिल्ली उसी क्षेत्र में या उसके आसपास विकसित हुई है। ऐसा भी माना जाता है कि शहर का प्रसिद्ध पुराना किला इंद्रप्रस्थ के अवशेषों पर निर्मित है, जो दिल्ली के पौराणिक महत्व और भारतीय सभ्यता से उसके गहरे संबंध को दर्शाता है।

Delhi Name History (Photo: Canva)

दिल्ली के नाम का इतिहास (फोटो: Canva)

इसी संदर्भ में, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल ने एक बार फिर एक रोचक मुद्दा उठाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर सुझाव दिया है कि अब समय आ गया है जब राजधानी का नाम अंग्रेजी में ‘Delhi’ नहीं, बल्कि ‘Dilli’ लिखा जाना चाहिए। गोयल का तर्क है कि “Delhi” शब्द का कोई भाषाई या सांस्कृतिक अर्थ नहीं बनता है, जबकि “Dilli” शब्द हमारी संस्कृति, परंपरा और इतिहास से गहराई से जुड़ा है। उनके अनुसार, जब आम बोलचाल में हर कोई “दिल्ली” कहता है, तो अंग्रेजी में भी इसका सही उच्चारण ‘Dilli’ ही लिखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में गलत स्पेलिंग “Delhi” प्रचलन में आ गई थी, जिसे अब सुधारा जा सकता है। आज हम आपको दिल्ली के नाम के साथ इसके दिलचस्प इतिहास से भी रूबरू करवाएंगे।

दिल्ली सल्तनत काल और स्थानीय धरोहर

दिल्ली सल्तनत के दौर (13वीं से 16वीं शताब्दी) में इस नगर को आमतौर पर “डिल्ली” कहा जाने लगा। यह नाम आज भी प्रचलन में है। हालांकि “डिल्ली” शब्द की उत्पत्ति को लेकर मतभेद हैं, लेकिन कई इतिहासकार मानते हैं कि इसका संबंध पहली शताब्दी ईसा पूर्व में शासन करने वाले राजा ढिल्लू से हो सकता है। मामलुक, खिलजी और तुगलक जैसे अनेक राजवंशों के अधीन यह शहर राजनीतिक शक्ति का केंद्र बना। प्रत्येक शासक ने अपनी राजधानी के रूप में अलग-अलग नगरों जैसे लाल कोट, सिरी फोर्ट, महरौली, फिरोज शाह कोटला, शेरगढ़, जहांपनाह और तुगलकाबाद की स्थापना की, लेकिन लोग इन सबको मिलाकर “डिल्ली” ही कहते रहे।

After whom was Delhi named? (Photo: Canva)

किसके नाम पड़ा दिल्ली नाम? (फोटो: Canva)

राजा धीलू और दिल्ली

दिल्ली ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण शहर है, जो भारत का प्रमुख वाणिज्यिक, परिवहन, सांस्कृतिक और राजनीतिक केंद्र माना जाता है। एक प्रचलित कथा के अनुसार, इस नगर का नाम राजा धीलू के नाम पर पड़ा, जिन्होंने ईसा पूर्व पहली शताब्दी में इस क्षेत्र पर शासन किया था। समय के साथ इस नाम के कई रूप प्रचलित हुए जैसे दिल्ली, देहली, दिल्ली और धिल्लि जो संभवतः राजा धीलू के नाम से ही उत्पन्न हुए हैं। क्षेत्रफल की बात करें तो पुरानी दिल्ली लगभग 360 वर्ग मील (932 वर्ग किलोमीटर) में फैली है, जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का विस्तार 573 वर्ग मील (1,483 वर्ग किलोमीटर) तक है। जनगणना के अनुसार, वर्ष 2001 में पुरानी दिल्ली की जनसंख्या लगभग 1 करोड़ 22 लाख 60 हजार थी, जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की आबादी लगभग 1 करोड़ 38 लाख 50 हजार थी। वर्ष 2011 में यह संख्या क्रमशः बढ़कर पुरानी दिल्ली में लगभग 1 करोड़ 10 लाख 7 हजार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 1 करोड़ 67 लाख 53 हजार तक पहुंच गई।

मुगलों युग की राजधानी

17वीं शताब्दी में सम्राट शाहजहां ने एक भव्य दीवारों से घिरा नगर बसवाया, जिसे “शाहजहांनाबाद” नाम दिया गया। आज यही क्षेत्र “पुरानी दिल्ली” के नाम से प्रसिद्ध है। इस शहर में लाल किला, जामा मस्जिद और चांदनी चौक जैसी प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतें और बाजार बने। शाहजहांनाबाद न केवल मुगल साम्राज्य की राजधानी था बल्कि कला, संस्कृति और व्यापार का भी केंद्र था। इसकी गलियां, हवेलियां और बाजार आज भी उस समय की शाही भव्यता की झलक पेश करते हैं।

Delhi in modern India (Photo: Canva)

आधुनिक भारत की दिल्ली (फोटो: Canva)

ब्रिटिश काल से आधुनिक भारत तक

ब्रिटिश काल में “दिल्ली” नाम को आधिकारिक रूप से अपनाया गया, हालांकि स्थानीय लोग तब भी इसे “डिल्ली” ही कहते थे। वर्ष 1911 में अंग्रेजों ने कोलकाता से राजधानी हटाकर दिल्ली को भारत की नई राजधानी घोषित किया। आजादी के बाद दिल्ली का निरंतर विस्तार हुआ, और नई दिल्ली को भारत सरकार के प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया। समय के साथ इस नगर का नाम इंद्रप्रस्थ से डिल्ली, फिर शाहजहांनाबाद और अंततः दिल्ली हो गया। हर नाम इसकी गौरवशाली ऐतिहासिक यात्रा का प्रतीक है। हालांकि, हाल में इस नाम को बदलने के सुझाव पर सरकार की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इस विषय ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा जरूर छेड़ दी है।

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Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदी author

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अप... और देखें

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