दिल्ली

बैंक धोखाधड़ी में 122 करोड़ का घोटाला, ED ने दाखिल की चार्जशीट

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने अपने कारोबार का टर्नओवर फर्जी तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया, ताकि बैंक से नए लोन और क्रेडिट फैसिलिटी मिलती रहे। इसी तरीके से कंपनी ने 60 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया।

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(फोटो-ट्विटर)

बेंगलुरु : बेंगलुरु की प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में एसोसिएट लम्बर्स प्राइवेट लिमिटेड (ALPL) और इसके 17 अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष पीएमएलए कोर्ट, बेंगलुरु में चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला करीब 122 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी से जुड़ा है। यह जांच सीबीआई, एसीबी बेंगलुरु की एक एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी, जिसमें कंपनी और इसके डायरेक्टर्स पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे।

जांच में सामने आया कि कंपनी के डायरेक्टर्स मो. फारूक सुलेमान दरवेश, मनोहरलाल सतारामदास अगीचा, सरिचंद सतारामदास अगीचा और इब्राहिम सुलेमान दरवेश ने बैंक से मिले लोन का गलत इस्तेमाल किया। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (पहले कॉरपोरेशन बैंक) से मिले लोन को इन्होंने अपनी बहन कंपनियों और दूसरी फर्मों में घुमा दिया। कुछ पैसों से प्रॉपर्टी खरीदी गई और कुछ रकम बहन कंपनियों के पुराने लोन चुकाने में लगाई गई।

ED की जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने अपने कारोबार का टर्नओवर फर्जी तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया, ताकि बैंक से नए लोन और क्रेडिट फैसिलिटी मिलती रहे। इसी तरीके से कंपनी ने 60 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया।इतना ही नहीं, करीब 7 करोड़ रुपये का स्टॉक कंपनी के डायरेक्टर्स ने गायब कर दिया और दावा किया कि वह चेन्नई की बाढ़ में नष्ट हो गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ रकम पनामा और कोस्टा रिका भेजी गई, जहां कंपनी के एक डायरेक्टर के रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी इंपोर्ट डीलिंग दिखाई गई।

इन सभी तरीकों से आरोपियों ने करोड़ों रुपये की काली कमाई (POC) बनाई। अब तक ED ने इस मामले में 47 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है, जिसमें हाल ही में 4 करोड़ रुपये की संपत्ति की अटैचमेंट शामिल है। फिलहाल ED इस पूरे घोटाले की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही और भी खुलासे होने की संभावना है।

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Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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