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दिल्ली टू फरीदाबाद का सफर अब आसान नहीं, दो महीने तक सरिता विहार फ्लाईओवर पर चलेगा काम

Sarita Vihar Flyover: दिल्ली से फरीदाबाद का सफर करने वालों के लिए एक जरूरी अपडेट सामने आया है। सरिता विहार फ्लाईओवर पर जल्द ही मरम्मत का काम शुरू होने वाला है। यातायात पुलिस से लोक निर्माण विभाग ने इसके लिए इजाजत मांगी है। एडवाइजरी जारी होने पर काम शुरू होगा।

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सरिता विहार फ्लाईओवर।

Photo : PTI

Delhi to Faridabad: अगर आप भी सड़कमार्ग से रोजाना दिल्ली से फरीदाबाद का सफर करते हैं तो अगले दो महीने तक थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। सरिता विहार फ्लाईओवर (Sarita Vihar Flyover) की मरम्मत का काम जल्द ही शुरू होगा, जिसके चलते सफर की गति धीमी हो जाएगी। इसके लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा जल्द एडवाइजरी जारी की जा सकती है। विभाग ने यातायात पुलिस से इसके लिए इजाजत मांगी है।

दिल्ली से फरीदाबाद का सफर होगा धीमा

यातायात पुलिस से अनुमति मिलने के बाद दिल्ली सूचना एवं प्रचार विभाग के पास एडवाइजरी के प्रकाशन के लिए लोक निर्माण विभाग फाइल भेजेगा। फ्लाईओवर का उपयोग करने से बचने को लेकर विभाग इस एडवाइजरी के जरिए लोगों को जागरूक करेगा। इससे पहले इसी वर्ष जुलाई माह में एडवाइजरी जारी की गई थी, लेकिन कांवड़ यात्रा के कारण उस वक्त काम शुरू नहीं हो पाया था। जून महीने में जब मरम्मत का काम शुरू हो रहा था तो यातायात पुलिस ने इसे रुकवा दिया था, क्योंकि पीडब्ल्यूडी द्वारा इसकी एडवाइजरी जारी नहीं की गई थी।

रोजाना लाखों वाहन की आवाजाही होती है

रोजाना लाखों वाहन सरिता विहार फ्लाईओवर का इस्तेमाल करके दिल्ली से फरीदाबाद के बीच सफर करते हैं। ऑफिस टाइम में इस मार्ग पर वाहनों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। ऐसे में सरिता विहार फ्लाईओवर की मरम्मत का काम शुरू होता है तो यात्रियों को भारी मुश्किलें देखने को मिल सकती हैं।

साल 2022 से लंबित पड़ा है मरम्मत का काम

फ्लाईओवर पर होने वाला मरम्मत कार्य बीते लंबे समय से टल रहा है। अप्रैल 2022 में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी मंत्री मनीष सिसोदिया ने इसे मंजूरी दी थी, तभी से ये लंबित था। इसके बाद इस साल 1 मई से मरम्मत का काम शुरू होना था, लेकिन लोकसभा चुनाव की वजह से इसे टाल दिया गया। अधिकारियों ने ये जानकारी साझा की है कि कुल चार चरणों में मरम्मत का कार्य होगा।

15-15 दिनों के लिए फ्लाईओवर का आधा हिस्सा बंद किया जाएगा। पूरा फ्लाईओवर एक वक्त पर बंद नहीं होगा। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने इस फ्लाईओवर का निर्माण वर्ष 2001 में कराया था।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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