दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दक्षिणी रेंज की टीम द्वारा एक बड़े अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। ऑपरेशन में अफ्रीकी मूल के चार सक्रिय तस्कर गिरफ्तार किए गए हैं और उनके कब्जे से 20.146 किलोग्राम मेथामफेटामाइन तथा 700 ड्रग टैबलेट बरामद की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब्त किए गए ड्रग्स की कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है।
जिन आरोपियों को पकड़ा है, उनके नाम हैं:
- एजेबुएनी एस्टर ओसिटा उर्फ एला (नाइजीरिया)
- चार्ल्स चिमुआन्या एबेरेनवू उर्फ अमोरका (नाइजीरिया)
- चिनोये इमैनुअल (नाइजीरिया)
- डायरा इद्रिस उर्फ व्हाइट मनी/सर व्हाइट (कोट द’आईवोर)
दरअसल, 1 नवंबर 2025 को स्पेशल सेल को सूचना मिली कि दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले कुछ अफ्रीकी मूल के लोग देश के विभिन्न राज्यों में ड्रग सप्लाई कर रहे हैं। सूचना के आधार पर धौलाकुआं बस स्टैंड के पास जाल बिछाया गया। आधी रात के करीब एक महिला एस्टर उर्फ एला को रेड कलर के ट्रॉली बैग के साथ रोका गया। तलाशी के दौरान उसके बैग से 17.146 किलोग्राम मेथामफेटामाइन और 700 ड्रग टैबलेट्स बरामद हुईं। उसके खिलाफ NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। पूछताछ में एला ने बताया कि वह दिल्ली स्थित एक बड़े ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा है और उसने यह ड्रग ‘अमोरका’ नामक साथी से चंदर विहार से लिया था। साथ ही वह इसे बेंगलुरु के ‘व्हाइट मनी’ को डिलीवर करने जा रही थी।
इसके बाद 5 नवंबर को चंदर विहार क्षेत्र में छापेमारी कर चार्ल्स उर्फ अमोरका को गिरफ्तार किया गया, जिसके घर से 3 किलोग्राम मेथामफेटामाइन मिली। इसी दौरान निलोठी एक्सटेंशन की टेक चंद कॉलोनी में एक मोबाइल ड्रग मैन्युफैक्चरिंग लैब भी पकड़ी गई, जहां से प्रीकर्सर केमिकल्स, कैल्शियम क्लोराइड, मेथनॉल, कलर केमिकल्स, सॉल्वेंट्स और लैब उपकरण भी बरामद हुए।
6 नवंबर को लैब संचालित करने वाले आरोपी चिनोये इमैनुअल को गिरफ्तार किया गया। 7 नवंबर को तकनीकी विश्लेषण की मदद से बेंगलुरु से डायरा इद्रिस उर्फ व्हाइट मनी को भी दबोच लिया गया। एला दिल्ली के जनकपुरी, विकासपुरी और उत्तम नगर क्षेत्रों में ड्रग उठाती थी।वह दिल्ली से ट्रेन द्वारा मुंबई और बेंगलुरु ड्रग सप्लाई करती थी। अमोरका तीन साल से ड्रग तस्करी में सक्रिय था और उसके कई शहरों में नेटवर्क हैं।
चिनोये मोबाइल ड्रग फैक्ट्री संचालित कर ड्रग तैयार करता था। व्हाइट मनी बेंगलुरु में सप्लायर था और ड्रग्स की बिक्री के बाद रकम अनौपचारिक चैनलों से नाइजीरिया भेजता था। चारों आरोपी भारत में अवैध रूप से रह रहे थे और उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं मिले। इस आधार पर विदेशी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। स्पेशल सेल अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी रखे हुए है। इस ऑपरेशन को अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है।
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