Delhi: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जगह-जगह कूड़े की समस्या बढ़ती जा रही है। इसी स्थिति को देखते हुए कूड़े के निपटारे के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने दिल्ली सरकार से समझ कूड़ा निस्तारण के लिए कार्य योजना प्रस्तुत की है। इस योजना के अनुसार, 2028 तक दिल्ली मे कूड़े के पहाड़ों को पूरी तरह से साफ कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, यहां होने वाले कूड़े के पहाड़ों के निर्माण को भी रोकने की योजना बनाई गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान समय में दिल्ली में प्रतिदिन 11,300 टन कूड़ा उत्पन्न होता है। इसमें केवल 8,010 टन का ही निस्तारण किया जाता है। शेष 3,000 टन कूड़े को लैंडफिल में डाला जाता है। एमसीडी का अनुमान है कि 2028 तक कूड़े की उत्पत्ति और बढ़ेगी। यह करीब 13,229 टन प्रतिदिन पहुंच जाएगी। वहीं निस्तारण की क्षमता भी बढ़ेगी और यह 14,000 टन प्रतिदिन हो जाएगी। इससे न केवल कूड़े का निस्तारण होगा, बल्कि कूड़े के पहाड़ भी खत्म हो जाएंगे।
कूड़ा निस्तारण के लिए बिजली संयंत्रों की क्षमता बढ़ेगी
मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत ओखला और तेहखंड में बिजली बनाने के संयंत्रों की क्षमता को बढ़ाया जाएगा। साथ ही गाजीपुर में एक नए प्लांट की स्थापना की जाएगी। वर्तमान समय की बात करें तो ओखला संयंत्र में अभी 1550 टन कूड़े का निस्तारण किया जाता है। इसे आगे आने वाले समय में 1 हजार टन और बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। तेहखंड संयंत्र में 1000 और गाजीपुर में 2000 टन प्रतिदिन क्षमता होगी। इससे कूड़े का निस्तारण पूरी तरह से हो पाएगा। इस योजना के तहत दिल्ली नगर निगम का लक्ष्य है कि 2028 तक कूड़े के पहाड़ों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।
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