दिल्ली

कार्ड-टोकन को करिए बॉय-बॉय, अब QR Scan कर खुद करें Delhi Metro की सवारी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 3, 2023, 10:44 AM IST

Delhi Metro: डीएमआरसी ने एक ट्वीट के जरिए बताया, यात्रियों के लिए दो स्टेशनों के बीच यात्रा को सुविधाजनक और परेशानी मुक्त बनाने के लिए 'डीएमआरसी ट्रैवल' नाम का ऐप लॉन्च किया गया है। यात्री इसके जरिए मोबाइल क्यूआर टिकट बना सकते हैं।

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दिल्ली मेट्रो

Delhi Metro: दिल्ली मेट्रो में सफर करना अब और भी ज्यादा आसान हो गया है। अब न ही आपको लंबी लाइन में खड़े होकर टिकट काउंटर से टोकन लेने की जरूरत है और न ही बार-बार स्मार्ट कार्ड को रीचार्ज कराने की। अब आप दिल्ली मेट्रो के एक मोबाइल एप से क्यूआर कोड जनरेट करके भी आसानी से यात्रा कर सकते हैं।

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने यात्रियों के लिए एक मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया है। इसके जरिए यात्री खुद ही दिल्ली मेट्रो में यात्रा के लिए क्यूआर टिकट जनरेट कर सकेंगे। दरअसल, यह मोबाइल एप्लिकेशन यात्रियों को ऑनलाइन टिकट खरीदने और क्यूआर कोड जनरेट करने की अनुमति देगा, जिसे उन्हें यात्रा शुरू करने से पहले स्टेशन पर स्कैन करना होगा।

DMRC ने एप किया लॉन्च

डीएमआरसी ने एक ट्वीट के जरिए बताया, यात्रियों के लिए दो स्टेशनों के बीच यात्रा को सुविधाजनक और परेशानी मुक्त बनाने के लिए 'डीएमआरसी ट्रैवल' नाम का ऐप लॉन्च किया गया है। यात्री इसके जरिए मोबाइल क्यूआर टिकट बना सकते हैं। डीएमआरसी के एमडी डॉ. विकास कुमार ने कहा, इस नए मोबाइल ऐप के साथ यात्री अब सीधे अपने स्मार्टफोन से टिकट खरीद सकते हैं, जिससे टिकट काउंटर और वेंडिंग मशीन पर जाने या कतार में खड़े होने की जरूरत खत्म हो जाएगी।

एप पर यात्रियों को मिलेंगी कई सुविधाएं

'डीएमआरसी ट्रैवल' एप पर यात्रियों को ट्रैवल प्लानर, किराया कैलकुलेटर, स्टेशन की जानकारी और स्मार्ट कार्ड रिचार्ज जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलेंगी। डीएमआरसी ट्रैवल ऐप एंड्रॉइड प्लेटफॉर्म पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है और जल्द ही आईओएस उपयोगकर्ताओं के लिए भी यह उपलब्ध हो जाएगा। अभी यह टिकट सिंगल जर्नी के लिए ही उपलब्ध होगा। यानी आपको जितनी बार यात्रा करनी है, उतनी बार क्यूआर को जनरेट करना पड़ेगा। डीएमआरसी जल्द ही सिंगल क्यूआर कोड आधारित टिकटिंग सिस्टम भी लागू करने की तैयारी में है। इसके जरिए लोग सिंगल क्यूआर कोड जनरेट कर सकेंगे और उसकी वैधता खत्म होने तक उसी के जरिए यात्रा कर सकेंगे।

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प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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