दिल्ली सरकार ने स्वच्छ, हरित और प्रदूषण मुक्त दिल्ली की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है। मंगलवार, 4 मार्च यानी आज उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भलस्वा लैंडफिल साइट पर बांस रोपण अभियान की शुरुआत की। इसे दिल्ली सरकार के प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण सुधार के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। बांस रोपण अभियान से भलस्वा लैंडफिल साइट को एक नया जीवन मिलेगा। क्योंकि यह शहर के प्रमुख कचरा डंपिंग स्थलों में से एक है। यह वर्षों से प्रदूषण और पर्यावरणीय संकट का कारण बन रहा है। इस समस्या को हल करने के लिए दिल्ली सरकार और नगर निगम मिलकर बायोमाइनिंग और लैंड रिक्लेमेशन जैसे उपायों पर काम कर रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण होगा बांस रोपण अभियान
बांस रोपण दिल्ली सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि बांस की तेजी से बढ़ने की क्षमता इसे प्रदूषण नियंत्रण, कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण और मिट्टी के संरक्षण के लिए आदर्श बनाती है। दिल्ली सरकार के अनुसार, 'विकसित भारत 2047' के तहत भलस्वा, गाजीपुर और ओखला लैंडफिल साइटों पर बायोमाइनिंग और भूमि सुधार की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कचरे के पहाड़ों को हटाकर इन स्थानों को हरित क्षेत्र में परिवर्तित करना है। इस प्रक्रिया में बांस रोपण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, क्योंकि यह हवा की गुणवत्ता को सुधारने और मिट्टी के कटाव को रोकने में मदद करेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हरित दिल्ली अभियान को अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि दिल्ली सरकार ग्रीन बेल्ट के विकास, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पौधारोपण अभियान को तेज करने की योजनाओं पर काम कर रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के कदम लगातार उठाए जाएं, तो अगले कुछ वर्षों में दिल्ली के कचरे के पहाड़ों को पूरी तरह से समाप्त किया जा सकता है। इसके परिणामस्वरूप दिल्ली को एक स्वच्छ, हरित और प्रदूषण मुक्त शहर बनाया जा सकता है।
(इनपुट - आईएएनएस)
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