दिल्ली

'गरीबों के मकान तुड़वा रहे हैं भाजपा सांसद', AAP ने लगाया आरोप; जानें क्या है सारा माजरा

Delhi Politics: बीजेपी और आप के बीच नई जंग छिड़ गई है। AAP ने भाजपा सांसद पर गरीबों के मकान तुड़वाने का आरोप लगाया है। नई दिल्ली की सांसद और सुषमा स्वराज की बेटी पर सवाल उठाते हुए आप ने पूछा कि क्या यह बांसुरी स्वराज के निर्देश पर हो रहा है या अधिकारी मनमानी कर रहे हैं?

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आम आदमी पार्टी ने भाजपा सांसद पर लगाए गंभीर आरोप।

AAP vs BJP: आम आदमी पार्टी (आप) ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भाजपा सांसद अपनी पार्टी की केंद्र सरकार के तहत आने वाले विभागों से गरीबों के मकान तुड़वाकर उन्हें बेघर बना रहे हैं। ‘आप’ के नेता और विधायक दुर्गेश पाठक ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सिविल लाइंस में मकान 'अवैध रूप से ढहाए गए' और आजादी के बाद से वहां रह रहे लोगों को 'बेघर'कर दिया गया।

'रेलवे ने अब झुग्गियों को तोड़ने का दिया है नोटिस'

दुर्गेश पाठक ने कहा, 'अब रेलवे ने 22 जुलाई को बरार स्क्वायर की झुग्गियों को तोड़ने का नोटिस दिया है, लेकिन नयी दिल्ली से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद बांसुरी स्वराज वहां लोगों से मिलने नहीं गईं।' भाजपा ने आप के आरोपों पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

भाजपा पर आम आदमी पार्टी का गंभीर आरोप

उन्होंने आरोप लगाया, 'कुछ दिन पहले ही डीडीए ने सिविल लाइंस इलाके में हजारों लोगों के मकानों को आक्रामक तरीके से ध्वस्त कर दिया था और डीडीए के अधिकारी अब भी उस इलाके में जाकर लोगों को धमकाते हुए कह रहे हैं कि और मकान भी तोड़े जाएंगे।' उन्होंने कहा, 'वहीं केंद्र सरकार के रेलवे विभाग ने 22 जुलाई से पहले बरार स्क्वायर में रेलवे ट्रैक के पास लोहा मंडी, बुध नगर, इंद्रपुरी में हजारों झुग्गियों को तोड़ने का नोटिस लगा दिया है। रेलवे विभाग भी भाजपा की केंद्र सरकार के अधीन आता है।'

बांसुरी स्वराज पर आप नेता ने उठाए गंभीर सवाल

आप विधायक ने पूछा कि रेलवे उन मकानों को ढहाने के लिए किसके निर्देश पर नोटिस लगा रहा है। उन्होंने कहा, 'इसके पीछे कौन है? क्या यह बांसुरी स्वराज के निर्देश पर हो रहा है या अधिकारी मनमानी कर रहे हैं? इसकी जांच होनी चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।'

पाठक ने कहा कि इन दोनों मामलों की जांच होनी चाहिए और इसके पीछे जो भी हो, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'दिल्ली की जनता ने भाजपा सांसदों को चुना है, इसलिए इन कार्रवाइयों को रोकना उनकी जिम्मेदारी है।'

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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