दिल्ली

डरना है तो यहां आएं : 14वीं सदी का खजाना है ये जगह, फिरोज शाह तुगलक से है संबंध

अगर आपको डर से प्यार है, अगर आपको डरावनी जगहों पर जाना अच्छा लगता है तो दिल्ली में ये जगह आपको बहुत पसंद आएगी। आप ब्लू लाइन मेट्रो से भी यहां पहुंच सकते हैं। 14वीं सदी के इस महल में शाम को 5 बजे के बाद एंट्री की इजाजत नहीं है।

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झंडेवालान मेट्रो स्टेशन के बहुत पास है

Know you City: दिल्ली की सबसे ज्यादा डरावनी जगह! ये सुनते और पढ़ते ही कुछ लोग तो इस जगह से दूरी बना लेंगे। लेकिन कुछ शौकिया लोग जिन्हें अभी तक यहां के बारे में पता नहीं है, वह पहली फुर्सत में यहां आना चाहेंगे। जी हां, ये बात सही है कि 14वीं सदी का यह खजाना दिल्ली के बीचों-बीच करोल बाग में है। तो फिर कब जा रहे हैं आप यहां? जाने का मन बना ही लिया है तो नाम भी जान लीजिए... इसका नाम 'भूली भटियारी का महल' (Bhuli Bhatiyari ka Mahal) है। भले आप डरावनी जगह (Haunted Place in Delhi) के नाम पर यहां जाना चाहें, या ऐतिहासिक जगह के नाम पर... या यहां कभी न जाने का ही प्लान बना रहे हों... पहले इसके बारे में अच्छे से जान लीजिए। जान लीजिए कि इसका नाम भूली भटियारी का महल क्यों है? इतिहास में ऐसा क्या हुआ कि यह जगह दिल्ली की सबसे डरावनी जगहों में से एक बन गई? चलिए इतिहास की इस भूतिया कहानी में डुबकी लगाते हैं...

कब जाएं भूली भटियारी का महल देखने

भूली भटियारी का महल को भूतिया जगह माना जाता है। यह दिल्ली के सबसे डरावने हॉन्टेड प्लेस के रूप में कुख्यात है। सुबह 7 से शाम 5 बजे तक यहां जा सकते हैं। शाम को 5 बजे के बाद यहां रुकना मना है। 5 बजे स्वयं पुलिसकर्मी लोगों को यहां से बाहर निकाल देते हैं। यहां एंट्री गेट पर एक बोर्ड भी लगा है, जिस पर साफ लिखा है कि सूर्यास्त के बाद यहां प्रवेश वर्जित है। शाम होते ही पुलिस इस ओर जाने वाली रोड पर बैरिकेड्स लगाकर रास्ता रोक देती है।

भूली भटियारी का महल की कहानी

इस महल की कहानी उस समय की है, जब दिल्ली पर फिरोज शाह तुगलक का राज था। कहा जाता है कि इस किले का निर्माण फिरोज तुगलक ने शिकारगाह के लिए करवाया था। कहानी है कि यह जगह उनकी रानी को पहुत पसंद थी। इसलिए बाद में रानी यहां रहने लगी। कुछ कहानियों के अनुसार एक बार राजा ने रानी को किसी अन्य शख्स के साथ इश्क करते हुए देख लिया। इस बात से नाराज राजा ने रानी को यहीं पर कैद कर लिया। रानी अपनी आखिरी सांस तक यहां रही और उसकी मौत हो गई।

कुछ स्थानीय लोगों के अनुसार राजा से बदला लेने की हसरत मन में रखकर रानी ने इस किले में आत्महत्या कर ली थी। यही कारण है कि आज भी रानी की आत्मा इस महल में भटकती है और वह राजा से बदला लेना चाहती है। यहां घूमने आने वाले लोगों का दावा है कि उन्हें शाम ढलने के बाद रानी यहां नजर आयी है। कहा जाता है कि शाम ढलने के बाद या रात के समय कोई व्यक्ति इस किले या इसके आसपास से भी गुजरता है तो वह रानी के बदले का शिकार हो सकता है।

रानी की एक और कहानी है मशहूर

भूली भटियारी का महल को लेकर एक और कहानी प्रचलित है। इस कहानी के अनुसार एक समय की बात है, जब राजस्थानी कबीले की एक महिला यहां अपना रास्ता भूल गई थी। भटककर यहां पहुंची महिला को यह जगह पसंद आ गई और वह यहीं रुक गई। कहा जाता है कि उस महिला को रास्ता भूल जाने और फिर हमेशा के लिए उसी जगह पर रह जाने के कारण इस जगह का नाम भूली भटियारिन का नाम मिला, जो आगे चलकर भूली भटियारी का महल कहलाया।

दिल्ली टूरिज्स का क्या है कहना

दिल्ली टूरिज्म इसे दिल्ली का जैम यानी हीरा बताता है। दिल्ली टूरिज्म की वेबसाइट पर इसके बारे में बताया गया है कि इसको लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। एक कहानी तो इस महल की फीमेल केयरटेकर 'बू-अली भट्टी' से जुड़ी है। दिल्ली टूरिज्म के अनुसार एक अन्य कहानी सूफी संत बू-अली बख्तियार से जुड़ी है, जो यहां रहा करते थे।

कहां है भूली भटियारी का महल

भूली भटियारी का महल दिल्ली में सेंट्रल रिज रिजर्व फॉरेस्ट में है, जो करोल बाग क्षेत्र में आता है। इस जगह के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है। आज भूली भटियारी महल में कुछ बचा है तो चिनाई वाला घुमावदार मेहराब युक्त एंट्री गेट और एक बड़ा सा आयताकार प्रांगण। इसके बारे में कम ही लोग जानते हैं, इसलिए ज्यादातर फोटोग्राफर ही यहां आते हैं।

कैसे जाएं भूली भटियारी का महल

भूली भटियारी का महल जाने के लिए आपको सबसे पहले करोल बाग पहुंचना होगा। अगर आप मेट्रो से यहां जाना चाहते हैं तो बता दें कि यह दिल्ली मेट्रो के ब्लू लाइन से जुड़ी हुआ है। यहां जाने के लिए आपको ब्लू लाइन मेट्रो से झंडेवालन मेट्रो स्टेशन पर उतरना होगा। करोल बाग में बग्गा लिंक से भूली भटियारी के महल तक जाने के लिए एक रास्ता है। इस रास्ते से आप एक वीरान जंगल के अंदर जाते हैं और इस भूतिया महल तक पहुंच जाते हैं।

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Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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