दिल्ली

'बिगड़ रही है CM केजरीवाल की तबीयत', AAP के दावे को BJP ने बताया नाटक

Delhi News: दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की तबीयत को लेकर नई सियासी लड़ाई शुरू हो गई है। आम आदमी पार्टी ने दावा किया है कि केजरीवाल की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक है। वहीं भाजपा ने इसे नाटक करार दिया है। आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं AAP ने क्या कहा।

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जेल में सीएम अरविंद केजरीवाल।

Photo : Times Now Digital

AAP vs BJP on Kejriwal Health Issue: आम आदमी पार्टी (आप) ने रविवार को आरोप लगाया कि न्यायिक हिरासत में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के स्वास्थ्य को ‘गंभीर’ खतरा है। वहीं, पलटवार करते हुए भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने दावा किया कि आप नेता अदालत को गुमराह करने और केजरीवाल को जमानत दिलाने के लिए उनके स्वास्थ्य पर बार-बार बयान देकर नाटक कर रहे हैं।

खतरनाक स्टेज पर केजरीवाल का शुगर लेवल

दिल्ली की कैबिनेट मंत्री आतिशी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि मधुमेह से पीड़ित केजरीवाल का शुगर लेवल खतरनाक रूप से कम हो गया है। आतिशी ने कहा, 'भाजपा ने केजरीवाल को फर्जी मामले में जेल में डालने की साजिश रची। उनके स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है। उनका वजन 8.5 किलोग्राम कम हो गया है और सोते समय उनका शुगर स्तर पांच बार 50 से नीचे चला गया। यह विशेष रूप से मधुमेह रोगी के लिए चिंताजनक स्थिति है।'

'केजरीवाल को उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही'

उन्होंने कहा, 'अगर केजरीवाल को स्ट्रोक आता है, अगर उनके मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है या उन्हें स्थायी क्षति पहुंचती है, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? ' मंत्री ने दावा किया कि जेल में आप प्रमुख को उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। जब मंत्री से पूछा गया कि क्या वे इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे, तो उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वे अपने वकीलों और डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं।

आतिशी ने कहा, 'भाजपा को पता होना चाहिए कि अगर अरविंद केजरीवाल को कुछ हुआ तो न सिर्फ देश बल्कि भगवान भी उन्हें माफ नहीं करेगा।'

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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