आवारा कुत्तों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया उसको लेकर पशुप्रेमी और एक्सपर्ट क्या सोचते हैं, इसको लेकर हमारे संवाददाता रविकांत राय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी से खास बातचीत की ,
सवाल...आज सुप्रीम कोर्ट पर सबकी नजरें टिकी थी, आज जो फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है उसको आप कैसे देखती हैं
मेनका गांधी..
सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला सुनाया है उस पर सबको खुश होना चाहिए क्योंकि यह एक बहुत ही बैलेंस फैसला है यह गुस्से में आकर लिया गया फैसला नहीं है..और यह एक लाइन का फैसला नहीं है की जाओ जाकर सबको हटा दो,
आज जो सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है वह एक पॉलिसी पर आधारित है और मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करती हूं
अपने 25 साल पहले पॉलिसी बनाई की नसबंदी होनी चहिए और समय-समय पर कोर्ट ने भी इस बात को माना लेकिन सरकार ने एक पैसा नहीं डाला इस कार्यक्रम में
आप बताइए की मंदसौर की नगर पालिका को एक एबीसी केंद्र बनाना है जिसके लिए पचास लाख रुपए लगेंगे, अब 50 लाख ख रुपए कहां से आएंगे , तो उन्होंने एबीसी नहीं बनाया और एबीसी नहीं किया
अंत में सरकार का कोई रिश्तेदार आता है और कहता है कि कॉन्ट्रैक्ट मुझे दीजिए और कॉन्ट्रैक्ट उसको दे दिया गया उसने 2, 4 कुत्तों की नसबंदी की और बाकी को ऐसे ही छोड़ दिया...
सवाल.. आपने ने कहा की नेशनल लेवल पर एक पॉलिसी है लेकिन सरकार के द्वारा पैसे नहीं दिए इस कार्यक्रम के लिए, इसे ज़रा विस्तार से बता
जवाब.. मेनका गांधी
जब पोलियो को इस देश से हटाना था सरकार ने हर महीने 700 करोड रुपए कार्यक्रम पर खर्च किए तब जाकर इतने लंबे समय के बाद पोलियो मुक्त भारत हुआ
यहां कुत्तों की नसबंदी करनी थी और आपने इस कार्यक्रम में एक भी पैसे दिए नहीं
आपने इस काम के लिए किसी भी एनजीओ को ट्रेनिंग दी नहीं की कैसे काम करना है... खासतौर पर महाराष्ट्र की बात करें तो इसमें माफिया घुस गए
एक आदमी जो किसी नेता का रिश्तेदार था वो 15 एनजीओ चलाएगा, अलग अलग नाम से और म्युनिसिपल कमिश्नर को कहा जाता है की इसको काम दो , चाहे वो काम करे या न करे
हम सब चाहते है की कुत्ते काटे न और हम सब उनके साथ रहे , हम चाहते हैं की सभी इंडियन डॉग्स को एडॉप्ट करें,
सरकार ने कानून बनाया था की , कोई पेट शॉप्स की dukan नहीं होगी इस वक्त पंजाब में अकेले चार हज़ार पेट शॉप्स हैं
जो पूरे देश को बुली डॉग्स काटने वाले कुत्ते फैला रहे हैं सरकार ने यह आदेश दिया की 20 कुत्ते जो विदेशी नस्ल के है वह नहीं बेचे जाएंगे,
पांच राज्यों ने उस पर स्टे दे दिया, फिर कानून का अमल कैसे होगा
अब सरकार ने तीन दिन पहले संसद में इस बात की जानकारी दी है कि वह इस कार्यक्रम के लिए ढाई हजार करोड रपए देने जा रहे हैं जो एक अच्छी शरुआत है,
नेशनल पॉलिसी है, जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन पैसे कहां है की इसे अच्छे से इंप्लीमेंट किया जाए ,
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पशु प्रेमी खुश हैं, लेकिन समाज का एक धड़ा अपनी नाराजगी भी जाहिर कर रहा है
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