दिल्ली

'केजरीवाल को जान से मारने की साजिश रची गई है', AAP ने BJP पर लगाए ये 3 गंभीर आरोप

Delhi Politics: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के स्वास्थ्य को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच वाकयुद्ध का सिलसिला जारी है। आप सांसद संजय सिंह ने भाजपा पर केजरीवाल की सेहत से 'खिलवाड़' करने का आरोप लगाया है। उन्होंने ये तक कह दिया कि केजरीवाल को जान से मारने की साजिश रची गई है।

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आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर लगाया गंभीर आरोप।

Photo : Twitter

AAP vs BJP: आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तिहाड़ जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के स्वास्थ्य के साथ 'खिलवाड़' करने का रविवार को आरोप लगाया। संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि केजरीवाल की जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि उन्हें कभी भी कुछ भी हो सकता है।

किसने रची केजरीवाल को जान से मारने की साजिश?

संजय सिंह ने कहा, 'भाजपा केजरीवाल के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। पहले वे कह रहे थे कि वह (केजरीवाल) मिठाई खा रहे हैं और शर्करा का स्तर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब उनका (भाजपा) कहना है कि उन्होंने (केजरीवाल) खाना कम कर दिया है। कोई ऐसा क्यों करेगा और अपनी जान जोखिम में क्यों डालेगा।' उन्होंने कहा, 'केजरीवाल को जान से मारने की साजिश रची गई है।'

उपराज्यपाल के आरोपों पर क्या बोली आम आदमी पार्टी?

आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना के उस पत्र की आलोचना की, जिसमें कथित तौर पर कहा गया है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 'जानबूझकर' खुद को बीमार कर रहे हैं। पार्टी ने भाजपा पर केजरीवाल की 'हत्या की साजिश' रचने का आरोप लगाया। उपराज्यपाल सक्सेना ने आरोप लगाया है कि न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में बंद मुख्यमंत्री केजरीवाल उन्हें दी जा रही भोजन की चिकित्सकीय खुराक और दवाएं संभवत: जानबूझकर नहीं ले रहे।

जानबूझकर अपनी सेहत बिगाड़ रहे हैं सीएम केजरीवाल?

उपराज्यपाल ने मुख्य सचिव नरेश कुमार को लिखे पत्र में केजरीवाल के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जेल अधीक्षक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा 'जानबूझकर कम कैलोरी लिए जाने' के कई उदाहरण हैं, जबकि उन्हें घर का बना खाना पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि केजरीवाल ने सात जुलाई को रात्रि भोजन से पहले इंसुलिन लेने से इनकार कर दिया था।

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Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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