Delhi News: राजधानी दिल्ली में सुरक्षा और कानून व्यवस्था के बीच एक राहत भरी खबर सामने आई है। जनवरी 2026 में लापता होने वाले लोगों की संख्या में पिछले वर्षों के औसत के मुकाबले कमी देखी गई है। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, इस साल जनवरी में कुल 1,777 गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए, जबकि दिल्ली में हर महीने औसतन लगभग 2,000 मामले रिपोर्ट होते हैं।
एक दशक से स्थिर हैं आंकड़े
चौंकाने वाली बात यह है कि 2016 के बाद से दिल्ली की आबादी में काफी इजाफा हुआ है, लेकिन लापता होने वालों की संख्या सालाना 23,000 से 24,000 के बीच ही स्थिर बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि आंकड़ों में कोई बड़ा उछाल न आना यह दर्शाता है कि स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं हुई है, हालांकि हर गायब होने वाला व्यक्ति पुलिस के लिए चिंता का विषय है।
77 प्रतिशत की रिकवरी रेट
दिल्ली पुलिस ने बताया कि 2016 से अब तक कुल 1,80,805 लापता व्यक्तियों को खोजकर उनके परिवारों से मिलाया जा चुका है। यह लगभग 77 प्रतिशत की रिकवरी रेट है। पुलिस के मुताबिक, 'ऑपरेशन मिलाप' जैसी पहलों और AI-आधारित फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) जैसे आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल ने लोगों को खोजने में बड़ी भूमिका निभाई है।
केजरीवाल ने उठाए सवाल
इससे पहले, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। उन्होंने 2026 के पहले 15 दिनों में 807 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट पर चिंता व्यक्त की थी। केजरीवाल ने अपने पोस्ट में लिखा, "दिल्ली में सिर्फ 15 दिन में 807 लोग गायब हो गए, जिनमें सबसे ज्यादा महिलाएं और बच्चे हैं। ये हालात सामान्य नहीं, बेहद डराने वाले हैं। देश की राजधानी में लोगों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। दिल्ली में हर स्तर पर BJP के पास पूरी ताकत है, फिर भी दिल्ली इतनी असुरक्षित क्यों है ?"
बता दें कि आंकड़ों के मुताबिक साल 2020 में लापता होने वाले लोगों की संख्या सबसे कम 17,944 रही थी। पुलिस के अनुसार, उस समय कोरोना महामारी के कारण लागू राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की वजह से मामलों में यह भारी गिरावट आई थी।
