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अंतिम संस्कार की चल रही थी तैयारी, चिता से उठ बैठे 75 वर्षीय बुजुर्ग; सभी की फटी रह गई आंखें!

हरियाणा के यमुनानगर जिले के कोट बसावा की माजरी गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई जब एक 75 वर्षीय बुजुर्ग, जिन्हें मृत मान लिया गया था। अंतिम संस्कार से ठीक पहले अचानक जीवित हो उठे। यह चौंकाने वाली घटना बुधवार की दरमियानी रात घटी।

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हरियाणा के यमुनानगर की घटना (फोटो - टाइम्स नाउ नवभारत)

नई दिल्ली: हरियाणा के यमुनानगर जिले के कोट बसावा की माजरी गांव में उस वक्त सनसनी फैल गई जब एक 75 वर्षीय बुजुर्ग, जिन्हें मृत मान लिया गया था। अंतिम संस्कार से ठीक पहले अचानक जीवित हो उठे। यह चौंकाने वाली घटना बुधवार की दरमियानी रात घटी।

ग्रामीण सतपाल के अनुसार, उनके बड़े भाई शेर सिंह की तबीयत मंगलवार को अचानक खराब हो गई। उन्हें तत्काल यमुनानगर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने चेकअप करने के बाद बताया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है और गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे डॉक्टरों ने परिजनों को शेर सिंह की मृत्यु की सूचना दी और उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस दुखद खबर के बाद परिजन उन्हें गांव वापस ले आए। रिश्तेदारों को सूचित कर दिया गया और सभी अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए। गांव में शोक का माहौल था।

अचानक जीवित हो उठे शेर सिंह

अंतिम संस्कार से पहले जब परिजन शेर सिंह को नहलाने की तैयारी कर रहे थे, तो उनके मुंह में लगे एक पाइप को निकालने का प्रयास किया गया। जैसे ही पाइप निकाला गया, शेर सिंह ने अचानक गहरी सांस ली और उनके हाथ-पांव हिलने लगे। यह देख परिजनों में हड़कंप मच गया। सभी स्तब्ध रह गए, कुछ पल के लिए तो किसी को विश्वास ही नहीं हुआ कि जिसे वे मृत मान बैठे थे, वह जीवित है। इसके बाद शेर सिंह को तुरंत पानी दिया गया, जिसे उन्होंने एक गिलास तक पी लिया। स्थिति को देखते हुए परिजनों ने दोबारा उन्हें यमुनानगर के एक अन्य निजी अस्पताल में भर्ती कराया। फिलहाल शेर सिंह का इलाज चल रहा है और डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति पर निगरानी बनाए हुए है।

मातम के बाद परिवार में खुशी की लहर

पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ गांव में, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी चर्चा का विषय बना दिया है। लोग इसे चमत्कार बता रहे हैं तो कुछ अस्पताल की लापरवाही मान रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या डॉक्टरों की ओर से जल्दबाजी में मृत घोषित किया गया था या यह वास्तव में एक दुर्लभ चिकित्सकीय घटना थी। फिलहाल परिजन शेर सिंह के स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं और उनके परिवार में पसरे मातम के बाद खुशी की लहर है।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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