Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर के बनने का इंतजार आज का नहीं है। ये इंतजार कई सौ सालों का है। लंबे समय के इंतजार के बाद राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा एक धार्मिक उत्सव एक ऐतिहासिक दिन भी बन गया है। पूरे देश में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर उत्साहित है। सभी लोग टीवी के आगे बैठे हुए है ताकि प्राण प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण देख सकें।
राम मंदिर के लिए 500 साल से संघर्ष किया जा रहा था। ये लोगों के संघर्ष का ही फल है, जो आज पूरा भारत राममय हो उठा है। पूरा देश प्रभु श्रीराम के आगमन पर दिवाली मना रहा है। राम मंदिर के लिए लोगों ने अलग-अलग तरह से योगदान दिया है। वहीं एक राम भक्त ऐसे है, जिन्होंने राम मंदिर की मनोकामना लेकर भीष्म प्रतिज्ञा तक ले ली थी। सोमवार, 22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के समारोह के साथ उनकी ये प्रतिज्ञा पूरी होगी और वह अन्न ग्रहण कर पाएंगे। आइए आपको राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर उनके बारे में बताएं...
राम मंदिर के लिए भीष्म प्रतिज्ञा
बिहार के दरभंगा जिले में एक गांव है, जिसका नाम खैरा है। इस गांव में एक राम भक्त रहते हैं। इनका नाम वीरेंद्र कुमार बैठा है, लेकिन इन्हें झमेली बाबा के नाम से अधिक जाना जाता है। उन्होंने राम मंदिर को लेकर भीष्म प्रतिज्ञा ली और संकल्प लिया कि जब तक राम मंदिर का निर्माण नहीं हो जाता तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। आज उनकी ये प्रतिज्ञा पूरी होने वाली है। 31 वर्षों के लंबे समय के बाद वह अन्न ग्रहण करेंगे।
बता दें कि 31 वर्षों से वे केवल फलहार पर अपना जीवन जी रहे हैं। झमेली बाबा एक छोटी सी पान की दुकान चलाते हैं। आज राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पूरी होने के बाद वह अपने हाथों से सेंधा नमक से खाना बनाकर 31 साल पहले लिया ये उपवास तोड़ेंगे।
