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देहरादून में नकली दवाओं की फैक्ट्री का भंडाफोड़, नामी कंपनियों के रैपर में बन रही थीं फर्जी दवाएं

देहरादून में नकली दवाएं बनाने वाली एक फैक्ट्री पर संयुक्त छापेमारी में बड़ी मात्रा में फर्जी दवाएं बरामद की गई। आरोप है कि कई नामी फार्मा कंपनियों के नाम का गलत इस्तेमाल कर दवाएं बनाई जा रही थीं।

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नामी कंपनियों के नाम पर बन रही थीं फर्जी दवाएं (सांकेतिक फोटो)

Photo : iStock

उत्तराखंड के देहरादून में नकली दवाएं बनाने वाली एक कथित फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया गया है। इस छापेमारी में मशहूर फार्मा कंपनियों के नाम से बनाई जा रही भारी मात्रा में नकली दवाएं जब्त की गई हैं। यह कार्रवाई उत्तराखंड खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, उत्तर प्रदेश ड्रग कंट्रोल विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने की।

मशहूर कंपनियों के नाम पर बन रही थीं नकली दवाएं

अधिकारियों के अनुसार, ईस्ट होप टाउन इलाके के एक मकान में दवा बनाने की एक फैक्ट्री चल रही थी। इस फैक्ट्री में कथित तौर पर सिप्ला, ल्यूपिन, डॉ रेड्डीज, एल्डर, माइक्रो, मैनकाइंड, इंटास, एबॉट, सन फार्मा, एरिस्टो, मैकलियोड्स और जाइडस जैसी जानी-मानी फार्मा कंपनियों के नाम और ब्रांड का गलत इस्तेमाल करके नकली दवाएं बना रही थी। इन नकली दवाओं की पैकेजिंग और रैपर इतने हुबहू बनाए गए थे कि आम ग्राहक या मेडिकल स्टोर संचालक आसानी से धोखा खा जाएं।

कई तरह की नकली दवाएं और सामान जब्त

छापेमारी के दौरान गैबापिन-100, जोरिल M-2, और सेफोलैक-200 जैसी दवाओं के नकली पैकेट, लेबल, रैपर, पैकिंग सामग्री और दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए। इन दवाओं को जब्त कर लिया गया है और जांच के लिए इनके नमूने लैब में भेज दिए गए हैं।

दूसरे राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं तार

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस नकली दवा गिरोह के संबंध अन्य राज्यों से भी हो सकते हैं। पुलिस और ड्रग विभाग मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। संदिग्धों से पूछताछ जारी है और पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

Pooja Kumari
पूजा कुमारीauthor

पूजा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा कर चुकी पूजा को टीवी मीडिया में भी काम करने का अनुभव है। शहरी मुद्दों की गहरी समझ के कारण पूजा लोकल न्यूज, मेट्रो व रेल अपडेट्स, रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर, लोकल डेवलपमेंट, मौसम, क्राइम, स्थानीय राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मजबूत पकड़ रखती हैं। शहरों की नब्ज पहचानने और स्थानीय संवेदनशीलताओं को खबरों में प्रभावी ढंग से पिरोने की क्षमता उनकी राइटिंग स्किल को विशेष बनाती है। पूजा अब तक 3,000 से अधिक न्यूज रिपोर्ट्स लिख चुकी हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण लोकल अपडेट्स, विश्लेषणात्मक स्टोरीज और रिपोर्ताज शामिल हैं।

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