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'भारत अब अपने फैसले खुद लेता है'... गोरखपुर में सीएम योगी का संदेश, अधिवक्ताओं से की यह खास अपील

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और उसके खिलाफ संभावित चुनौतियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। गोरखपुर में अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने सोशल मीडिया के जरिए समाज में विभाजन फैलाने वाली कोशिशों से सतर्क रहने की अपील की।

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नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह में सीएम योगी

CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत के तेजी से बढ़ते प्रभाव से परेशान कुछ ताकतें देश को कमजोर करने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट, भ्रामक प्रचार और समाज में जाति, क्षेत्र, भाषा के आधार पर विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा सकती है। गोरखपुर के सिविल कोर्ट परिसर में बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 12 सालों में भारत ने विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के क्षेत्र में प्रगति की है। आज भारत दुनिया के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

भारत का आर्थिक सफर भी बेहद प्रभावशाली

सीएम योगी ने कहा कि भारत का आर्थिक सफर भी बेहद प्रभावशाली रहा है। कभी दुनिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं में गिने जाने वाला देश आज दुनिया की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि भारत के जल्द ही अमेरिका और चीन के साथ दुनिया की तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की संभावना से कुछ देश चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति को रोकने के लिए कई तरह की साजिशें की जा सकती हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से फर्जी पहचान वाले अकाउंट बनाकर लोगों को आपस में लड़ाने, जातीय और क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काने तथा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के प्रयास किए जा सकते हैं।

भारत को कमजोर करने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन कोशिशों का मकसद केवल भारत को कमजोर करना होगा। इसके साथ ही देश की प्रमुख संस्थाओं पर भी सवाल खड़े करने के प्रयास होंगे। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस चुनौती से निपटने में अधिवक्ता समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वकील समाज के जागरूक और जिम्मेदार प्रतिनिधि होते हैं। ऐसे समय में उनका दायित्व है कि वे जो भी कार्य करें, वह देश और समाज के हित को ध्यान में रखकर करें।

भारत अपने फैसले खुद ले रहा है

मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक भारत उन देशों की ओर देखता रहा, जिन्होंने कभी उस पर शासन किया था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब भारत अपने फैसले खुद ले रहा है और अपनी नीतियां खुद तय कर रहा है। दुनिया का कोई भी देश भारत की दिशा निर्धारित नहीं कर सकता। उन्होंने अधिवक्ताओं से देश और समाज के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर सतर्क रहने की अपील की। सीएम ने कहा कि यदि कानूनी समुदाय जागरूक और तैयार रहेगा तो समाज को भ्रमित करने वाली कई कोशिशों का प्रभावी तरीके से मुकाबला किया जा सकता है।

न्यायपालिका और अधिवक्ताओं के बीच तालमेल पर जोर

सीएम योगी ने न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए न्यायपालिका और अधिवक्ताओं के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को समय पर और सरल तरीके से न्याय दिलाने के लिए बेंच और बार के बीच सहयोग जरूरी है। कानूनी सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू होने से देश की न्याय प्रणाली को मजबूती मिली है और नागरिकों में नए कानूनों को लेकर भरोसा बढ़ा है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। साल 2017 से पहले राज्य में केवल दो फॉरेंसिक प्रयोगशालाएं थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर 12 हो गई है, जबकि छह अन्य प्रयोगशालाओं का निर्माण जारी है। इसके अलावा लखनऊ में स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई है और जांच प्रक्रिया को तेज करने के लिए हर जिले में दो फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई हैं।

200 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था में सुधार और बेहतर बुनियादी ढांचे के कारण राज्य की छवि बदली है। इससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं और पलायन में कमी आई है। अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अधिवक्ता कल्याण निधि के तहत मिलने वाली सहायता राशि को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा 500 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया है और करीब 4,000 दिवंगत अधिवक्ताओं के परिवारों को 200 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी गई है।

रिटेनरशिप फीस और अन्य आर्थिक सहायता में भी वृद्धि

सीएम योगी ने बताया कि अधिवक्ताओं को मिलने वाली सहायता की आयु सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है। साथ ही युवा वकीलों के लिए रिटेनरशिप फीस और अन्य आर्थिक सहायता में भी वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कई जिलों में अधिवक्ताओं के चैंबर और बार भवनों के निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत की गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट में करीब 600 करोड़ रुपये की लागत से वकीलों के लिए आधुनिक परिसर तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एकीकृत न्यायालय परिसरों का विकास किया जा रहा है, खासकर उन जिलों में जहां पहले जिला न्यायालयों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। इन परिसरों में पेयजल, पुस्तकालय, कैंटीन और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि अधिवक्ताओं और न्यायिक कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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