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Rewa: खाद वितरण केंद्र पर छिड़ी 'महाभारत', किसानों के बीच चले लात-घूंसे, देखें VIDEO

मध्य प्रदेश के रीवा जिले के करहिया गांव में शुक्रवार को खाद वितरण केंद्र पर उस समय तनाव फैल गया, जब खाद लेने पहुंचे किसानों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। टोकन और खाद की कमी को लेकर शुरू हुई कहासुनी देखते ही देखते मारपीट तक पहुंच गई, जिससे मौके पर अफरातफरी मच गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ी।

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रीवा में खाद वितरण केंद्र पर अफरातफरी

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Rewa News: मध्य प्रदेश के रीवा जिले के करहिया स्थित ग्राम पंचायत करहिया नंबर-1 में शुक्रवार को खाद वितरण केंद्र पर उस समय अफरातफरी मच गई, जब खाद लेने आए किसानों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। खाद के टोकन को लेकर शुरू हुई नोकझोंक देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गई। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें किसानों के बीच हाथापाई साफ दिखाई दे रही है। जानकारी के अनुसार, टोकन व्यवस्था और खाद की सीमित उपलब्धता के कारण किसान आपस में ही भिड़ गए। सुबह से ही बड़ी संख्या में किसान खाद लेने के लिए केंद्र पर पहुंच गए थे, जिससे लंबी कतारें लग गईं।

अव्यवस्थित वितरण और समय पर खाद न मिलने से किसानों में नाराजगी बढ़ती चली गई। इंतजार के दौरान पहले कहासुनी हुई, फिर धक्का-मुक्की शुरू हो गई और बाद में लात-घूंसे चलने लगे। हालात बिगड़ते देख मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया, जिसके बाद माहौल शांत हो सका। किसानों का कहना है कि समय पर खाद उपलब्ध न होने से उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे तनाव बढ़ रहा है। राहत की बात यह रही कि भीड़ के दबाव में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, वरना स्थिति और गंभीर हो सकती थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, काफी देर तक हालात बेकाबू बने रहे और क्षेत्र में हड़कंप की स्थिति रही।

नाकाम हुए प्रशासनिक इंतजाम

बता दें कि, खाद वितरण केंद्र पर भीड़ को नियंत्रित करने, व्यवस्थित कतार बनाने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस इंतजाम दिखाई नहीं दिए। सीमित संसाधन और कमजोर प्रशासनिक प्रबंधन के कारण स्थिति को संभालना मुश्किल हो गया। वर्तमान में रबी का मौसम चल रहा है, जिसमें किसान गेहूं, सरसों और चना जैसी फसलों के लिए खाद जुटाने में लगे हुए हैं। इसी कारण बड़ी संख्या में किसान खाद लेने केंद्र पर पहुंच गए।

यूरिया उपयोग का सही समय

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि रबी फसलों की बुवाई के दौरान अक्टूबर–नवंबर में डीएपी और पोटाश का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि बुवाई के लगभग 30 से 45 दिन बाद, दिसंबर से जनवरी के बीच पहली या दूसरी सिंचाई के समय यूरिया देना सबसे असरदार माना जाता है। इसी जरूरत के चलते करहिया खाद वितरण केंद्र पर किसानों की भीड़ लगातार बढ़ी, लेकिन वितरण व्यवस्था में उसी अनुपात में सुधार नहीं किया गया।

किसानों ने लापरवाही पर जताई नाराजगी

किसानों का आरोप है कि अगर पहले से खाद वितरण की बेहतर योजना बनाई जाती और पर्याप्त संख्या में कर्मचारी व सुरक्षा बल तैनात रहते, तो अव्यवस्था और मारपीट जैसी स्थिति नहीं बनती। घटना के बाद किसान संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि खाद वितरण केंद्रों पर पर्याप्त स्टाफ, पुलिस बल और सुचारू टोकन या लाइन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हो।

Nilesh DwivedI
निलेश द्विवेदीauthor

निलेश द्विवेदी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल की सिटी टीम में काम कर रहे हैं। वे शहरों से जुड़ी लोकल घटनाएं, क्राइम, राजनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राज्यवार अपडेट्स पर लगातार काम करते हैं। निलेश महत्वपूर्ण विवरणों को चुनने और पाठकों की रुचि के हिसाब से कंटेंट को प्रभावी तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते हैं। डिजिटल न्यूजरूम के रफ्तार भरे माहौल में वे हर खबर को सटीक एंगल, आसान भाषा और उपयोगी जानकारी के साथ पेश करने पर फोकस करते हैं और अबतक 2,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं।

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