चण्डीगढ़

प्रकाश सिंह बादल : सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री रहे, चुनाव लड़ने वाले सबसे उम्रदराज शख्स भी बने

  • Edited by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Apr 26, 2023, 08:01 AM IST

प्रकाश सिंह बादल यह चुनाव भले हार गए थे, लेकिन देश में चुनाव लड़ने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति होने के नाते रिकॉर्ड बुक में उनका नाम दर्ज हो गया।

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प्रकाश सिंह बादल

Photo : ANI

Prakash Singh Badal: पंजाब के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके बादल का मंगलवार को चंडीगढ़ के पास मोहाली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। सांस लेने में परेशानी होने के बाद उन्हें नौ दिन पहले ही अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह 95 वर्ष के थे। आइए जानते हैं सियासत के इस दिग्गज का कैसा रहा राजनीतिक सफर।

लंबी सीट से थे सबसे उम्रदराज उम्मीदवार

प्रकाश सिंह बादल जीवन या राजनीति के क्षेत्र में आसानी से हार मानने वालों में से नहीं थे। पिछले साल ही शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने विधानसभा चुनाव के लिए पंजाब के मुक्तसर जिले में लंबी सीट से उन्हें उम्मीदवार बनाया था। प्रकाश सिंह बादल यह चुनाव भले हार गए थे, लेकिन देश में चुनाव लड़ने वाले सबसे उम्रदराज व्यक्ति होने के नाते रिकॉर्ड बुक में उनका नाम दर्ज हो गया। बठिंडा जिले के बादल गांव के सरपंच बनने के साथ शुरू हुए लंबे राजनीतिक करियर में यह उनकी 14वीं चुनावी लड़ाई थी।

1970 में सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने

बादल एक अलग पंजाबी भाषी राज्य के लिए चलाए गए आंदोलन का हिस्सा भी रहे। पंजाब की राजनीति के दिग्गज नेता बादल पहली बार 1970 में मुख्यमंत्री बने और उन्होंने एक गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया, जिसने अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया। इसके बाद वह 1977-80, 1997-2002, 2007-12 और 2012-2017 में भी राज्य के मुख्यमंत्री रहे। बादल 11 बार विधायक रहे और केवल दो बार राज्य विधानसभा का चुनाव हारे। वर्ष 1977 में वह केंद्र में कृषि मंत्री के रूप में मोरारजी देसाई की सरकार में थोड़े समय के लिए शामिल हुए। अपने राजनीतिक जीवन के आखिरी दौर में 2008 में बादल ने अकाली दल की बागडोर बेटे सुखबीर सिंह बादल को सौंप दी, जो उनके अधीन पंजाब के उपमुख्यमंत्री भी बने।

1927 को बठिंडा के अबुल खुराना गांव में जन्म

प्रकाश सिंह बादल का जन्म आठ दिसंबर 1927 को पंजाब के बठिंडा के अबुल खुराना गांव में हुआ था। बादल ने लाहौर के फॉरमैन क्रिश्चियन कॉलेज से स्नातक किया। उन्होंने 1957 में कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में मलोट से पंजाब विधानसभा में प्रवेश किया। 1969 में उन्होंने अकाली दल के टिकट पर गिद्दड़बाहा विधानसभा सीट से जीत हासिल की। जब पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री गुरनाम सिंह ने 1970 में दल-बदल करके कांग्रेस का दामन थामा था तब अकाली दल फिर से संगठित हो गया तथा इसके बाद इसने जनसंघ के समर्थन से राज्य में सरकार बनाई। वह तब देश के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री बने। यह बात दीगर है कि यह गठबंधन सरकार एक वर्ष से थोड़ा अधिक चली। वर्ष 2017 में बतौर मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल समाप्त किया तो वह इस पर रहने वाले सबसे अधिक उम्र के नेता थे।

एसवाईएल नहर का कड़ा विरोध किया

वर्ष 1972 में बादल सदन में विपक्ष के नेता बने, लेकिन बाद में फिर से मुख्यमंत्री बने। बादल के नेतृत्व वाली सरकारों ने किसानों के हितों पर अपना ध्यान केंद्रित किया। उनकी सरकार के महत्वपूर्ण निर्णयों में कृषि के लिए मुफ्त बिजली देने का निर्णय भी शामिल था। अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने सतलुज यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर के विचार का कड़ा विरोध किया, जिसका उद्देश्य पड़ोसी राज्य हरियाणा के साथ नदी के पानी को साझा करना था। इस परियोजना को लेकर एक आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए 1982 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। यह परियोजना पंजाब के निरंतर विरोध के कारण अभी तक लागू नहीं हो सका है।

पत्नी की 2011 में कैंसर से मौत

उनके नेतृत्व में राज्य विधानसभा ने विवादास्पद पंजाब सतलुज यमुना लिंक नहर (स्वामित्व अधिकारों का हस्तांतरण) विधेयक, 2016 पारित किया। यह विधेयक परियोजना पर तब तक की प्रगति को उलटने के लिए था। उनकी पार्टी ने 2020 में केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से अपना नाता तोड़ लिया। प्रकाश सिंह बादल की पत्नी सुरिंदर कौर बादल की 2011 में कैंसर से मौत हो गई थी। उनका बेटा सुखबीर सिंह बादल और बहू हरसिमरत कौर बादल दोनों ही राजनीति में सक्रिय हैं। सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने उन्हें 'पंथ रतन फख्र-ए-कौम' - या प्राइड ऑफ द फेथ - की उपाधि से सम्मानित किया, जिसकी कई लोगों ने आलोचना भी की। (भाषा इनपुट)

अमित कुमार मंडल
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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