पराली जलाने पर CAQM की सख्ती; दिल्ली-एनसीआर समेत इन राज्यों को सख्त निर्देश, हर खेत की होगी निगरानी
- Reported by: प्रेरित कुमारEdited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Feb 16, 2026, 07:31 PM IST
CAQM ने गेहूं की पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए पंजाब, हरियाणा और यूपी को सख्त एक्शन प्लान लागू करने का निर्देश दिया है। हर खेत की निगरानी, पराली सुरक्षा बल और मुफ्त मशीनों जैसी व्यवस्थाओं से प्रदूषण कम करने की तैयारी की जा रही है।
CAQM ने पराली जलाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए (सांकेतिक फोटो)
Wheat Stubble Burning Ban 2026: दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए Commission for Air Quality Management (CAQM) ने गेहूं की पराली जलाने को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को 2026 की गेहूं कटाई के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह खत्म करने के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान लागू करने को कहा है। दिल्ली और राजस्थान से भी सहयोग की अपेक्षा जताई गई है।
हवा की गुणवत्ता पर गंभीर असर
आयोग के अनुसार, फसल अवशेष जलाने से स्थानीय स्तर के साथ-साथ एनसीआर की हवा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ता है। सैटेलाइट डेटा के मुताबिक, अप्रैल से मई 2025 के बीच गेहूं कटाई के दौरान पंजाब में 10,207, हरियाणा में 1,832 और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में 259 आग की घटनाएं दर्ज की गई थीं। इन आंकड़ों ने गेहूं सीजन में भी कड़े कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित किया है।
नए निर्देशों के तहत होंगी ये चीजें
नए निर्देशों के तहत राज्यों को हर गांव और खेत का मैप तैयार करना होगा, ताकि यह तय किया जा सके कि पराली का प्रबंधन कैसे होगा। इसके लिए नोडल अधिकारियों को किसानों के समूहों से जोड़ा जाएगा, जो सीधे निगरानी करेंगे। छोटे और सीमांत किसानों को पराली प्रबंधन मशीनें मुफ्त उपलब्ध कराने और मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, जिला और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली सुरक्षा बल’ बनाने, निगरानी बढ़ाने और नियमों के उल्लंघन पर पर्यावरण मुआवजा लगाने की भी व्यवस्था की जाएगी।
पराली के वैकल्पिक उपयोग
आयोग ने राज्यों से पराली के वैकल्पिक उपयोग, जैसे चारे और अन्य औद्योगिक जरूरतों के लिए सप्लाई चेन मजबूत करने को भी कहा है। CAQM ने स्पष्ट किया है कि सभी राज्य नियमित प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे, ताकि निगरानी के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। आयोग का मानना है कि इन उपायों से पराली जलाने की घटनाओं में कमी आएगी और दिल्ली एनसीआर की हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।
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