वसई-विरार में BVA का दबदबा, अजीव पाटिल बने महापौर; ठाणे में शिवसेना की वापसी
- Edited by: Nilesh Dwivedi
- Updated Feb 3, 2026, 11:53 PM IST
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय राजनीति एक बार फिर सक्रिय हो गई है। पालघर जिले के वसई-विरार और ठाणे नगर निगम में महापौर-उपमहापौर चुनावों के जरिए प्रशासकीय शासन का अंत हुआ। इन चुनावों में बहुजन विकास अघाड़ी और महायुति गठबंधन ने अपनी-अपनी राजनीतिक मजबूती का स्पष्ट संदेश दिया।
शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की ठाणे नगर निगम में वापसी (फोटो: PTI)
महाराष्ट्र के पालघर जिले के वसई-विरार क्षेत्र में बहुजन विकास अघाड़ी (BVA) ने एक बार फिर अपना राजनीतिक दबदबा साबित किया है। पूर्व विधायक हितेंद्र ठाकुर के नेतृत्व वाली बीवीए के उम्मीदवार अजीव पाटिल को महापौर और मार्शल लोपिस को उपमहापौर चुना गया। यह चुनाव वसई-विरार सिटी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (VVCMC) मुख्यालय में आयोजित विशेष बैठक में हुआ, जिससे प्रशासकीय शासन का दौर समाप्त हो गया। जिला कलेक्टर एवं पीठासीन अधिकारी डॉ. इंदुरानी जाखड़ की देखरेख में हुई इस प्रक्रिया में महापौर पद के लिए बीवीए और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला हुआ।
अजीव पाटिल और दर्शना त्रिपाठी के बीच रहा मुकाबला
नामांकन वापस लिए जाने के बाद अंतिम मुकाबला बीवीए के अजीव पाटिल और भाजपा की दर्शना त्रिपाठी (कोटक) के बीच रहा। खुले मतदान (हाथ उठाकर मतदान) में कुल 115 पार्षदों ने हिस्सा लिया, जिसमें अजीव पाटिल को 71 और दर्शना त्रिपाठी (कोटक) को 44 वोट मिले। इसी तरह उपमहापौर पद के लिए बीवीए के मार्शल लोपिस और भाजपा के मांजरेकर नारायण सुरेश के बीच मुकाबला हुआ। यहां भी परिणाम वही रहा लोपिस को 71 और मांजरेकर को 44 मत प्राप्त हुए। नगर निगम प्रशासन के अनुसार, चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग रहा। उल्लेखनीय है कि अजीव पाटिल के भाई राजीव पाटिल 2010 में निगम गठन के समय पहले महापौर रह चुके हैं।
शार्मिला पिंपळोलकर बनीं 23वीं महापौर
वहीं, ठाणे नगर निगम में चार सालों बाद राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर के बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की शार्मिला पिंपळोलकर को निर्विरोध 23वीं महापौर चुना गया। भाजपा के कृष्णा पाटिल को उपमहापौर बनाया गया। दोनों पदों के लिए कोई अन्य नामांकन नहीं होने के कारण चुनाव निर्विरोध हुआ। महा युति गठबंधन के अंदर संतुलन बनाए रखने के लिए शिवसेना और भाजपा ने महापौर-उपमहापौर पद के लिए 15-15 महीनों का रोटेशन फॉर्मूला अपनाया है, ताकि पूरे कार्यकाल में अधिक से अधिक पार्षदों को नेतृत्व का अवसर मिल सके। इस अवसर पर ठाणे नगर निगम परिसर में उत्सव का माहौल देखने को मिला, जहां पारंपरिक महाराष्ट्रीयन वेशभूषा में महिलाओं ने ‘लेझिम’ नृत्य प्रस्तुत किया। इसके साथ ही निगम भवन के प्रवेश द्वार पर छत्रपति शिवाजी महाराज की विशाल प्रतिमा भी स्थापित की गई, जो आकर्षण का केंद्र बनी।
शिवसेना है सबसे बड़ी पार्टी
इधर ठाणे नगर निगम में विपक्ष के नेता पद को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) सक्रिय हो गई है। एनसीपी के वरिष्ठ पार्षद नजीब मुल्ला ने बताया कि उनकी पार्टी दो विकल्पों पर विचार कर रही है, या तो एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया जाए या शरद पवार गुट वाली एनसीपी (एसपी) के साथ मिलकर विपक्ष के नेता का पद हासिल किया जाए। उनके अनुसार, इस विषय पर एनसीपी प्रमुख अजित पवार के साथ भी चर्चा हो चुकी थी। ठाणे नगर निगम में शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके पास 75 पार्षद हैं, जबकि भाजपा के पास 28 सीटें हैं। बाकी सीटें एनसीपी (एसपी), एनसीपी, एआईएमआईएम, शिवसेना (यूबीटी) और एक निर्दलीय के बीच बंटी हुई हैं। एनसीपी ने स्पष्ट किया है कि वह शहर के विकास से जुड़े हर सकारात्मक प्रस्ताव का समर्थन करेगी।
(इनपुट - पीटीआई)
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