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कमोडिटी मार्केट का असली 'किंग' है सोना, 20 साल में सबसे बेहतर रिटर्न देने में सबसे आगे!

Gold Return: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार 2006-2026 के दौरान सोने ने 9.9% सालाना रिटर्न देकर अन्य कमोडिटीज को पछाड़ा। कम रोल-ओवर लागत, विविधता और कम अस्थिरता के कारण सोना एक मजबूत लॉन्ग-टर्म निवेश है।

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20 साल में सोने का दमदार रिटर्न: 9.9% की सालाना बढ़त से अन्य कमोडिटीज को पछाड़ा, WGC रिपोर्ट में खुलासा

Photo : iStock

Gold Return : वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की नई रिपोर्ट 'गोल्ड: द मोस्ट इफेक्टिव कमोडिटी इन्वेस्टमेंट 2026 एडिशन' के अनुसार, जून 2026 तक बीते 20 वर्षों में सोने ने 9.9% का सालाना स्पॉट रिटर्न दिया है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ सोने ने इस अवधि के दौरान करीब सभी प्रमुख कमोडिटीज और ब्रॉड कमोडिटी सूचकांकों को पीछे छोड़ दिया है। वायदा (Futures) बाजार के जरिए भी सोने ने 8.9% का रिटर्न दिया, जो इसके स्पॉट रिटर्न के काफी करीब है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सोने पर रोल-ओवर लागत का प्रभाव बहुत कम पड़ता है।

लंबी अवधि में सोने का दबदबा

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने विभिन्न निवेश अवधियों के आधार पर कमोडिटी बाजार का विश्लेषण किया। अध्ययन से पता चलता है कि सोने ने 3, 5, 10 और 20 साल की सभी अवधियों में व्यापक कमोडिटी इंडेक्स और अधिकांश सब-इंडेक्स की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि पिछले 20 वर्षों की अवधि में कई प्रमुख कमोडिटी कैटेगरी और उनके सब-इंडेक्स ने निवेशकों को नेगेटिव रिटर्न दिया है।

स्पॉट बनाम फ्यूचर्स का अंतर

जून 2006 से जून 2026 के बीच सोने और अन्य कमोडिटीज के रिटर्न के बीच का अंतर तब और स्पष्ट हो जाता है जब स्पॉट और फ्यूचर्स रिटर्न की तुलना की जाती है। जहां सोने ने 9.9% स्पॉट और 8.9% फ्यूचर्स रिटर्न दिया, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल ने इसी 20 साल की अवधि में -0.2% का स्पॉट रिटर्न और -7.2% का निराशाजनक फ्यूचर्स रिटर्न दर्ज किया। यह बड़ा अंतर सोने और अन्य भौतिक वस्तुओं के बीच के ढांचागत अंतर को उजागर करता है।

कंटैंगो और रोल-ओवर कॉस्ट का कम असर

कमोडिटी फ्यूचर्स में निवेश करने वाले निवेशकों को अक्सर फ्यूचर्स कर्व की स्थिति से नुकसान उठाना पड़ता है। जब बाजार 'कंटैंगो' (Contango - जहां फ्यूचर्स की कीमत स्पॉट कीमत से अधिक होती है) की स्थिति में होता है, तो कॉन्ट्रैक्ट्स को आगे बढ़ाने यानी रोल करने की लागत निवेशकों के कुल रिटर्न को घटा देती है। सोने के मामले में यह ड्रैग काफी कम होता है। सोने का बड़ा ऊपर ग्राउंड स्टॉक, कम भंडारण लागत और सीमित सुविधा लाभ इसके फ्यूचर्स कर्व को सपाट रखते हैं, जिससे फ्यूचर्स और स्पॉट रिटर्न में केवल 1 प्रतिशत अंक का अंतर रहता है।

मांग और कम उतार-चढ़ाव का फायदा

सोने का प्रदर्शन केवल इसकी कम भंडारण लागत पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसकी मांग के अनेक स्रोत भी इसे मजबूती प्रदान करते हैं। औद्योगिक गतिविधियों पर अत्यधिक निर्भर अन्य कमोडिटीज के विपरीत, सोने की मांग आभूषण, निवेश और तकनीक क्षेत्र में बंटी हुई है। आर्थिक अनिश्चितता के समय जहां निवेश मांग सोने की कीमतों को सहारा देती है, वहीं आर्थिक समृद्धि के दौर में उपभोक्ता मांग इसे मजबूती देती है। इसके अलावा, अन्य कमोडिटी समूहों की तुलना में सोने में उतार-चढ़ाव काफी कम देखा गया है।

पोर्टफोलियो में सोने की खास जगह

रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि सोना हर छोटी अवधि में हमेशा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला एसेट नहीं होता। छोटी अवधियों में यह कभी-कभी पिछड़ भी सकता है, लेकिन लंबी अवधि के क्षितिज पर इसका लाभ स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। निवेशकों के लिए मुख्य सीख यह है कि सोना केवल एक सामान्य कमोडिटी नहीं है, बल्कि यह पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करने और जोखिम घटाने वाला एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साधन है।

Ramanuj Singh
रामानुज सिंहauthor

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, इनकम टैक्स, बैंकिंग, बुलियन और कमोडिटी मार्केट जैसे विषयों पर गहरी विशेषज्ञता विकसित की है। जर्नलिज्म में एमए की डिग्री और वर्षों के अनुभव से विकसित विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ, रामानुज जटिल वित्तीय विषयों को सरल, विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। अब तक वे 22,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं।

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